जौनपुर/खेतासराय | तामीर हसन शीबू (न्यूज़ डेस्क)
जौनपुर के खेतासराय थाना क्षेत्र में अपराधों की बढ़ती बाढ़ ने पुलिस प्रशासन की नींद उड़ा दी है, लेकिन स्थानीय पुलिस की कार्यशैली अब भी सवालों के घेरे में है। आंकड़ों के विश्लेषण से एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है—मौजूदा थाना प्रभारी द्वारा 7 अक्टूबर 2025 को कार्यभार संभालने के बाद से, क्षेत्र में लगभग हर तीन महीने के अंतराल पर एक बड़ी और सनसनीखेज वारदात हो रही है। बावजूद इसके, पुलिस की सुस्ती और सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी कम होने का नाम नहीं ले रही है।
केस 1: डॉक्टर सुनील राजभर की संदिग्ध मौत (16 जनवरी)
थाना प्रभारी के कार्यकाल की पहली बड़ी चुनौती 16 जनवरी को सामने आई, जब बरजी गांव में 28 वर्षीय सुनील राजभर का शव संदिग्ध परिस्थितियों में पिलर से लटका मिला। सुनील गांव में ही अपनी डिस्पेंसरी चलाते थे।
- साजिश की आशंका: परिजनों का आरोप है कि रात 12 बजे किसी ने फोन कर उन्हें घर से बुलाया था।
- पुलिस की थ्योरी: अपर पुलिस अधीक्षक नगर आयुष श्रीवास्तव ने मामले को संदिग्ध बताया था, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी यह गुत्थी सुलझ नहीं सकी है।
केस 2: दूल्हे आजाद बिंद की हत्या (1 मई)
ताजा मामला 1 मई की देर शाम का है, जिसने पुलिसिया गश्त के दावों की पोल खोल दी। बारात लेकर जा रहे दूल्हे आजाद बिंद की अपाची सवार नकाबपोश बदमाशों ने सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी। अपराधियों ने इस वारदात को तब अंजाम दिया जब क्षेत्र में ‘हाई अलर्ट’ और सुरक्षा के दावे किए जा रहे थे।
अपराध का पैटर्न और पुलिस की विफलता:
| घटना की तिथि | वारदात का स्वरूप | पुलिस का एक्शन |
| 07 अक्टूबर 2025 | वर्तमान थाना प्रभारी का पदभार ग्रहण | – |
| 16 जनवरी 2026 | डॉक्टर सुनील राजभर की संदिग्ध मौत | जांच जारी (अभी तक खुलासा नहीं) |
| 01 मई 2026 | दूल्हे आजाद बिंद की सरेआम हत्या | अपराधी फरार, इलाके में आक्रोश |
प्रशासनिक चुप्पी पर उठते गंभीर सवाल
खेतासराय की जनता अब सीधे तौर पर थाना प्रभारी की जवाबदेही तय करने की मांग कर रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर अपराधियों के हौसले इतने बुलंद कैसे हैं?
- क्या पुलिस की ‘खुफिया तंत्र’ और ‘बीट गश्त’ पूरी तरह फेल हो चुकी है?
- हर तीन महीने में हो रही वारदातों के बावजूद प्रभारी पर अब तक कोई विभागीय कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या प्रशासन किसी और बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है?
जनता में भारी आक्रोश
लगातार हो रही इन हत्याओं और संदिग्ध मौतों से क्षेत्र में भय का माहौल है। स्थानीय लोगों का मानना है कि पुलिस केवल घटना के बाद ‘जांच’ का आश्वासन देती है, लेकिन धरातल पर अपराध रोकने में नाकाम है। खेतासराय को अब कोरे आश्वासनों की नहीं, बल्कि ठोस सुरक्षा और लापरवाह अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की दरकार है।

