न्यूज़ डेस्क
कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने आज विपक्षी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए विकास के आंकड़े पेश किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री योगी के निर्देशन में किसानों की औसत आय 52 हजार से बढ़कर 1.20 लाख रुपये तक पहुंच गई है। मंत्री ने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती अखिलेश सरकार में किसानों का शोषण होता था और मिल मालिकों से सांठगांठ के चलते भुगतान सालों तक लटका रहता था।
तुलनात्मक रिपोर्ट: योगी सरकार बनाम पूर्ववर्ती सरकार
मंत्री शाही ने पिछली सरकार की “VIP संस्कृति” और वर्तमान सरकार की “किसान कल्याण” नीतियों के बीच का अंतर स्पष्ट किया:
| मुद्दा (Issue) | अखिलेश यादव सरकार | योगी आदित्यनाथ सरकार |
| गन्ना भुगतान | 34-34 महीने का लंबा इंतजार | 8 से 10 दिनों में सीधा भुगतान |
| किसानों की आय | ₹52,000 (औसत वार्षिक) | ₹1,20,000 तक पहुंची |
| गन्ना मूल्य | ₹300/क्विंटल (3 किस्तों में) | ₹400/क्विंटल (त्वरित भुगतान) |
| बिजली आपूर्ति | केवल VIP जिलों (इटावा, रामपुर) में | 16 लाख+ किसानों के बिल माफ |
रिकॉर्ड उत्पादन और एथेनॉल का ‘मास्टर स्ट्रोक’
कृषि मंत्री ने बताया कि गन्ने से एथेनॉल बनाने की नीति ने चीनी मिलों को आर्थिक रूप से मजबूत किया है। इससे न केवल भुगतान आसान हुआ है, बल्कि देश के कुल गन्ना उत्पादन में उत्तर प्रदेश का योगदान 55 प्रतिशत हो गया है।
उत्पादन के मुख्य आंकड़े:
- गेहूं: 425 लाख मीट्रिक टन।
- आलू: 245 लाख मीट्रिक टन।
- तिलहन: 48 लाख मीट्रिक टन (रिकॉर्ड)।
- भुगतान: अब तक ₹3,15,000 करोड़ का रिकॉर्ड गन्ना मूल्य भुगतान।
“काठ की हांडी बार-बार नहीं चढ़ती”
अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए शाही ने कहा कि विपक्ष जानता है कि उनकी सरकार नहीं बनने वाली, इसलिए वे हवा-हवाई वादे कर रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि पिछली सरकार में बिजली दरों में 60 फीसदी की बढ़ोतरी की गई थी, जबकि योगी सरकार नलकूपों और सोलर पैनल के जरिए मुफ्त सिंचाई की सुविधा दे रही है।
“अखिलेश सरकार में मिल मालिकों से सांठगांठ थी, इसलिए किसानों का भुगतान लटका रहता था। आज किसानों का भरोसा योगी सरकार पर है।” — सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री

