जौनपुर | विशेष ब्यूरो (NewsHour)
शीराज़-ए-हिंद के नाम से मशहूर जौनपुर नगर की ऐतिहासिक पहचान रही गंगा-जमुनी तहज़ीब, आपसी मोहब्बत, भाईचारे और इंसानी यकजहती की महान रिवायत को एक बार फिर नई बुलंदी मिली। मौका था अंजुमन जाफ़रिया के ज़ेर-ए-एहतिमाम स्थानीय इमामबाड़ा कल्लू मरहूम में कर्बला के प्यासे शहीदों की याद में आयोजित कदीम तरही शब्बेदारी के समापन का, जो रविवार को पूरी अकीदत, एहतराम और गमगीन माहौल में सम्पन्न हुई।
शनिवार की शाम से शुरू हुई इस कदीम शब्बेदारी में मुल्क के कोने-कोने से आए हजारों अकीदतमंदों ने गमगीन नौहाख़्वानी, सीनाज़नी (मातम) और आंसुओं के नज़राने के ज़रिये नवासा-ए-रसूल हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और शहीदान-ए-कर्बला को अपना ख़िराज-ए-अकीदत पेश किया।
कर्बला का पैग़ाम पूरी इंसानियत के लिए: मौलाना मेहर अब्बास रिज़वी
शब्बेदारी की पहली मजलिस को ख़िताब करते हुए प्रख्यात आलिम-ए-दीन मौलाना मेहर अब्बास रिज़वी ने कर्बला के अमर संदेश को रेखांकित करते हुए कहा:
“कर्बला का पैग़ाम किसी एक कौम, मजहब या फिरके तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए सब्र, इंसाफ़, सच्चाई और ज़ुल्म के ख़िलाफ़ डटकर खड़े होने की अनूठी मिसाल है। हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) की अज़ीम कुर्बानी कयामत तक पूरी दुनिया को अम्न, मोहब्बत और इंसानी अख़लाक़ का रास्ता दिखाती रहेगी।” — मौलाना मेहर अब्बास रिज़वी
मजलिस का आगाज़ सोज़ख़्वानी से हुआ, जिसे समर रज़ा और अफ़रोज़ रज़ा ने अपने दर्दभरे अंदाज़ में पेश किया।
इल्म, ईमानदारी और इंसाफ़ को अहमियत दें: मौलाना सफ़दर हुसैन जैदी
अंतिम मजलिस को ख़िताब करते हुए मौलाना सफ़दर हुसैन जैदी ने जब वाक़े-ए-कर्बला के दर्दनाक और मर्मस्पर्शी मंज़र का बयान किया तो पूरा इमामबाड़ा ग़मगीन हो उठा और अकीदतमंदों की आंखें अश्कबार हो गईं। उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक तरक़्क़ी और तरक्की के लिए ज़रूरी है कि लोग इल्म (शिक्षा), ईमानदारी और इंसाफ़ को प्राथमिकता दें तथा ऐसे रहनुमाओं का चुनाव करें जो इंसानियत और समाज की भलाई के लिए निष्पक्षता से काम करें।
जौनपुर अंजुमन जाफ़रिया शब्बेदारी का मुख्य तथ्यात्मक ब्योरा:
| मुख्य मापदंड | कदीम शब्बेदारी एवं मजहबी आयोजन का विवरण |
| आयोजन स्थल | इमामबाड़ा कल्लू मरहूम, जौनपुर नगर |
| आयोजक संस्था | अंजुमन जाफ़रिया (अध्यक्ष: नजमुल हसन नजमी) |
| मुख्य खतीब (वक्ता) | मौलाना मेहर अब्बास रिज़वी एवं मौलाना सफ़दर हुसैन जैदी |
| मुख्य सोजख्वां | समर रज़ा एवं अफ़रोज़ रज़ा |
| कार्यक्रम के संचालक | ज़ाहिद कानपुरी, बिलाल हसनैन एवं मोहम्मद अब्बास ऋषभ |
| शामिल प्रमुख अंजुमने | अंजुमन हैदरिया (अम्बेडकर नगर), सज्जादिया (कोपागंज/मऊ), कारवाने अज़ा (जानसठ) आदि |
शबीहे ताबूत बरामद, देश भर से आईं अंजुमनों ने किया मातम
मजलिस के समापन के उपरांत गमगीन माहौल में शबीहे ताबूत बरामद हुआ, जिसके हमराह अंजुमन हैदरिया अब्दुल्लाहपुर (अम्बेडकर नगर), अंजुमन सज्जादिया कोपागंज (मऊ), अंजुमन कारवाने अज़ा जानसठ, अंजुमन रौनके अज़ा मुस्तफ़ाबाद, अंजुमन सज्जादिया जलालपुर सहित जौनपुर नगर की विभिन्न मातमी अंजुमनों ने बारी-बारी से तरही नौहाख़्वानी और सीनाज़नी कर मातम का नज़राना पेश किया। पूरे आयोजन के दौरान अज़ादारी के साथ-साथ आपसी सौहार्द, मोहब्बत और गंगा-जमुनी तहज़ीब की ख़ास झलक देखने को मिली।
कार्यक्रम के समापन पर अंजुमन जाफ़रिया के अध्यक्ष नजमुल हसन नजमी ने सभी अंजुमनों, अतिथियों और अकीदतमंदों का सहृदय शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में मोहब्बत, इंसानी यकजहती और आपसी एहतराम के धागे को मज़बूत करते हैं। कार्यक्रम का कुशल संचालन संयुक्त रूप से ज़ाहिद कानपुरी, बिलाल हसनैन एवं मोहम्मद अब्बास ऋषभ ने किया।
इस बड़े मजहबी समागम में मुख्य रूप से नजमुल हसन नजमी, मीनू खान, मास्टर वसीम, शाहनवाज़ ख़ान, आफ़ताब, हसन अब्बास मोनू, चंदू, रेशब, मीनू, डॉ. राहिल, आरिज़ ज़ैदी, ताबिश ज़ैदी, बिका, सकलैन, अंजुम ख़ान, शकील ख़ान, लाडले ख़ान, अबूज़र ज़ैदी सहित हज़ारों की तादाद में इमाम हुसैन (अ.स.) के अकीदतमंद उपस्थित रहे।

