शाहगंज / जौनपुर | विशेष ग्राउंड रिपोर्ट (NewsHour)
जौनपुर जनपद के शाहगंज क्षेत्र अंतर्गत बड़ागांव और उसके आसपास के इलाकों में सिंचाई विभाग की घोर लापरवाही का एक बड़ा खामियाजा अन्नदाताओं को भुगतना पड़ रहा है। मुख्य मानसूनी सीजन और धान की रोपाई के इस सबसे पीक समय पर शारदा सहायक नहर के माइनर पूरी तरह सफेद हाथी साबित हो रहे हैं। माइनर में पानी नहीं छोड़े जाने के कारण क्षेत्र के दर्जनों गांवों में सैकड़ों बीघा धान की खेती और नर्सरी पूरी तरह प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
निजी संसाधनों से बढ़ रही लागत, फसल बेचकर भी नहीं निकल रहा खर्च
नहर विभाग की इस बेरुखी को लेकर न्यूज़ पोर्टल NewsHour की टीम ने धरातल पर पहुंचकर क्षेत्रीय किसानों से सीधी बातचीत की, जिसमें उनका दर्द और आक्रोश साफ छलक कर सामने आया:
- लागत में भारी इजाफा: बड़ागांव निवासी किसान गुड्डू मौर्या ने बताया कि धान की रोपाई के लिए इस समय खेतों में पानी की सबसे सख्त जरूरत है। माइनर में धूल उड़ रही है, जिसके कारण लाचार किसान अब महंगे डीजल फूंककर निजी ट्यूबवेल और संसाधनों से सिंचाई करने को मजबूर हैं। इससे खेती की लागत कई गुना बढ़ गई है।
- दोहरी मार झेल रहे अन्नदाता: स्थानीय किसान सभाजीत ने बातचीत में कहा कि क्षेत्र के दर्जनों गांवों में सैकड़ों बीघा जमीन इस समय भीषण जल संकट से जूझ रही है। निजी साधनों से धान की रोपाई करने में जो भारी-भरकम खर्च आता है, उसकी भरपाई सीजन के अंत में फसल बेचकर भी पूरी नहीं हो पाती। ऊपर से बाजार में यूरिया और डीएपी (DAP) खाद भी ब्लैक में या बेहद मुश्किल से मिल पा रही है, जिससे किसानों पर दोहरी मार पड़ रही है।
“सरकार के दावे हवाई, खाद-पानी के लिए तरस रहे किसान” – समीम हैदर
क्षेत्र के वरिष्ठ और प्रगतिशील किसान समीम हैदर ने व्यवस्था पर सीधा सवाल उठाते हुए कहा:
“उत्तर प्रदेश सरकार भले ही कागजों पर किसानों के हित और उनकी आय दोगुनी करने की कितनी भी बड़ी-बड़ी बातें कर ले, लेकिन कड़वी जमीनी हकीकत यह है कि सही समय पर किसानों को न तो खाद-सामग्री मिल पाती है और न ही खेतों के लिए सिंचाई का पानी। इस बार प्राकृतिक रूप से भी पानी का संकट गहराया हुआ है, क्योंकि क्षेत्र में मानसूनी बारिश औसत से काफी कम हो रही है। ऐसे में अगर सरकारी नहरों में भी पानी नहीं आएगा, तो हमारी फसलें खेतों में ही सूख जाएंगी।” — समीम हैदर, वरिष्ठ किसान (बड़ागांव)
जल संकट और कृषि क्षेत्र पर प्रभाव का पूरा लेखा-जोखा:
| मुख्य विवरण | शाहगंज (जौनपुर) नहर संकट की रूपरेखा |
| प्रभावित नहर प्रणाली | शारदा सहायक नहर (बड़ागांव माइनर), शाहगंज |
| प्रभाव का दायरा | क्षेत्र के दर्जनों गांव और सैकड़ों बीघा धान के खेत |
| तात्कालिक समस्याएं | नहर में पानी का अभाव, यूरिया व डीएपी खाद की भारी किल्लत |
| आर्थिक प्रभाव | निजी पंपसेट चलाने से कृषि इनपुट कॉस्ट (लागत) में रिकॉर्ड बढ़ोतरी |
| किसानों की सरकार से मांग | तत्काल माइनर में टेल (अंतिम छोर) तक पानी छोड़ना सुनिश्चित किया जाए |
तत्काल पानी छोड़ने की पुरजोर मांग, आंदोलन की चेतावनी
बड़ागांव, शाहगंज और आसपास के पीड़ित क्षेत्रीय किसानों ने सामूहिक रूप से प्रदेश सरकार और सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों से गुजारिश की है कि बिना किसी विधिक विलंब के शारदा सहायक नहर के इस माइनर में तत्काल प्रभाव से पानी छोड़ा जाए। किसानों का कहना है कि यदि अगले दो से तीन दिनों के भीतर नहरों में पानी का प्रवाह बहाल नहीं किया गया, तो बची-खुची फसलें पूरी तरह बर्बाद हो जाएंगी। क्षेत्र के किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने उनकी सुध नहीं ली, तो वे शाहगंज तहसील मुख्यालय पर प्रदर्शन करने को विवश होंगे।

