रुदौली (अयोध्या) | न्यूज़ डेस्क (NewsHour)
अयोध्या जनपद की रुदौली तहसील से इस वक्त की एक बहुत बड़ी खबर सामने आ रही है। शासन द्वारा लागू की जा रही नई ई-पंजीकरण व्यवस्था (E-Registration System) के विरोध में स्थानीय दस्तावेज लेखक, अधिवक्ता और स्टाम्प विक्रेता पूरी तरह लामबंद हो गए हैं। इस नई ऑनलाइन व्यवस्था को अपने पारंपरिक रोजगार और आजीविका के खिलाफ बताते हुए आक्रोशित संघ ने उपनिबंधक (रजिस्ट्रार) कार्यालय परिसर में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है।
पहले ही दिन ठप रहा पंजीकरण कार्य, सरकार को लाखों के राजस्व का नुकसान
आंदोलन और धरने के पहले ही दिन उपनिबंधक कार्यालय में इसका व्यापक असर देखने को मिला। तहसील परिसर में वकीलों और लेखकों के कड़े रुख के चलते कार्यालय में एक भी रजिस्ट्री नहीं हो सकी। पूरा पंजीकरण कार्य पूरी तरह ठप रहने के कारण शासन को पहले ही दिन लाखों रुपये के राजस्व (Revenue) का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।
प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर सीधा आरोप लगाया है कि इस नई व्यवस्था के जरिए उनके रोजगार को छीनने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे तहसील पर निर्भर सैकड़ों परिवारों के सामने सीधे तौर पर गहरा आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा।
आंदोलन की मुख्य कड़ियाँ और वर्तमान स्थिति:
| मुख्य विवरण | आंदोलन की रूपरेखा |
| आंदोलन का मुख्य कारण | नई ई-पंजीकरण (E-Registration) व्यवस्था लागू होना |
| आंदोलनकारी संगठन | दस्तावेज लेखक संघ, अधिवक्ता संघ एवं स्टाम्प विक्रेता |
| आंदोलन का स्वरूप | अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन एवं पूर्ण कार्य बहिष्कार |
| पहले दिन का असर | एक भी रजिस्ट्री नहीं हुई, शासन को लाखों का राजस्व नुकसान |
| मुख्य मांग | नई ई-पंजीकरण से जुड़ी अधिसूचना को तत्काल वापस लिया जाए |
ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा कोई जिम्मेदार अधिकारी, फूटा आक्रोश
धरने पर बैठे आंदोलनकारियों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक मांग पत्र (ज्ञापन) तैयार किया था। इसे सौंपने के लिए प्रदर्शनकारी दिनभर प्रशासनिक अधिकारियों का इंतजार करते रहे।
धरनारत लोगों का गंभीर आरोप है कि पूरा दिन बीत जाने के बाद भी उनका ज्ञापन लेने तहसील का कोई भी जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। अधिकारियों के इस उदासीन और संवेदनहीन रुख से प्रदर्शनकारियों में नाराजगी और अधिक बढ़ गई है। दस्तावेज लेखक संघ ने दोटूक शब्दों में कहा है कि इस नई अधिसूचना को सरकार तत्काल प्रभाव से वापस ले।
“मांग पूरी होने तक जारी रहेगा कार्य बहिष्कार” – आंदोलनकारी
अधिवक्ताओं और दस्तावेज लेखकों के संगठनों ने संयुक्त रूप से शासन-प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि जब तक उनकी जायज मांगें पूरी नहीं की जातीं और इस अव्यावहारिक व्यवस्था को पूरी तरह वापस नहीं लिया जाता, तब तक यह अनिश्चितकालीन आंदोलन और कार्य बहिष्कार निरंतर जारी रहेगा। किसी भी कीमत पर रजिस्ट्री कार्यालय को चलने नहीं दिया जाएगा।
पहले दिन ये प्रमुख लोग रहे मौजूद:
धरने के पहले दिन मुख्य रूप से त्रिभुवन दत्त निषाद, सुशील गुप्ता, राम अवध यादव, देवप्रकाश वर्मा सहित भारी संख्या में वरिष्ठ अधिवक्ता, स्टाम्प विक्रेता और दस्तावेज लेखक मौजूद रहे और अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।

