अयोध्या | न्यूज़ डेस्क (NewsHour)
उत्तर प्रदेश के अयोध्या जनपद में बेसिक शिक्षा परिषद के अंतर्गत कार्यरत शिक्षकों के वेतन भुगतान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। कम छात्र संख्या के नाम पर पहले वेतन रोके जाने की मनमानी कार्रवाई और अब बहाली के आदेश के बाद भी वित्त एवं लेखा अधिकारी द्वारा भुगतान न किए जाने से शिक्षकों में भारी आक्रोश है। वेतन जारी करने में की जा रही अनावश्यक हीला-हवाली और विभागीय लापरवाही के खिलाफ उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने अपनी आस्तीनें चढ़ा ली हैं और आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है।
छात्र संख्या बढ़ाई, फिर भी विभागीय लापरवाही में फंसा वेतन
गौरतलब है कि पिछले माह जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) द्वारा कम छात्र संख्या का आधार बनाकर प्राथमिक, कंपोजिट और उच्च प्राथमिक स्तर के करीब 190 विद्यालयों के शिक्षकों का मई माह का वेतन रोक दिया गया था। इस अव्यावहारिक कार्रवाई के बाद शिक्षकों ने युद्ध स्तर पर प्रयास करके 19 मई से पहले ही अपने-अपने विद्यालयों में छात्र संख्या में पर्याप्त वृद्धि कर ली।
इसके बावजूद, विभागीय अधिकारियों द्वारा समय से आख्या (सत्यापन रिपोर्ट) जमा न किए जाने के कारण मई के अंत तक वेतन बहाल नहीं हो सका। जून के प्रारंभ में बीएसए द्वारा कागजी तौर पर वेतन बहाली का आदेश तो जारी कर दिया गया, लेकिन अब नया पेच वित्त एवं लेखाधिकारी कार्यालय में फंस गया है।
मामले की मुख्य कड़ियाँ:
| मुख्य विवरण | स्थिति और आंकड़े |
| प्रभावित विद्यालय | अयोध्या जनपद के करीब 190 प्राथमिक व कंपोजिट स्कूल |
| प्रभावित शिक्षक | लगभग 400 से 500 शिक्षक और कर्मचारी |
| मुख्य समस्या | BSA द्वारा बहाली के बाद भी वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा भुगतान पर रोक |
| अधिकारियों का तर्क | एरियर की ग्रांट आने पर होगा भुगतान |
| शिक्षक संघ का दावा | बजट (ग्रांट) पूरी तरह उपलब्ध, जानबूझकर लटकाया जा रहा मामला |
बजट उपलब्ध होने के बाद भी अफसरों का ‘अड़ंगा’
वर्तमान में वित्त एवं लेखाधिकारी द्वारा यह तर्क देकर शिक्षकों का वेतन लटकाया जा रहा है कि जब ‘एरिया की ग्रांट’ (बजट) आएगी, तब भुगतान किया जाएगा। वहीं, शिक्षक संघ के पदाधिकारियों का साफ कहना है कि जनपद में करीब 400 से 500 शिक्षकों का नियमित वेतन बजट कार्यालय में पहले से ही सुरक्षित और उपलब्ध है। ऐसे में नियमित वेतन मद की धनराशि होने के बावजूद भुगतान न करना सीधे तौर पर मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न है।
“बगैर शासनादेश रोका गया वेतन, संगठन कतई बर्दाश्त नहीं करेगा” – नीलमणि त्रिपाठी
उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष एवं प्रांतीय ऑैडिटर नीलमणि त्रिपाठी ने विभागीय तानाशाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा:
“शिक्षकों का वेतन बिना किसी ठोस शासनादेश के जबरन बाधित किया गया। अब जब शिक्षकों ने छात्र संख्या बढ़ा दी है, तो भुगतान में हीला-हवाली की जा रही है। संगठन इस तानाशाही को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि जल्द से जल्द वेतन खातों में ट्रांसफर नहीं हुआ, तो संगठन प्रकरण से उच्चाधिकारियों को अवगत कराते हुए कलेक्ट्रेट पर उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगा। इसके बाद उत्पन्न होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति की शत-प्रतिशत जिम्मेदारी वित्त एवं लेखा अधिकारी की होगी।” — नीलमणि त्रिपाठी, जिलाध्यक्ष (प्राथमिक शिक्षक संघ)
अन्याय के खिलाफ जल्द होगी आंदोलन की घोषणा
जिला मंत्री डॉ. चक्रवर्ती सिंह ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब शिक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी पूरी करते हुए छात्र संख्या में पर्याप्त वृद्धि कर दी है, तो उनका वेतन रोकना पूरी तरह अव्यावहारिक और गैर-कानूनी है। बजट उपलब्ध होने के बाद भी भुगतान न करना अन्नदाताओं और राष्ट्र निर्माताओं के साथ सरासर अन्याय है।
वहीं, जिला कोषाध्यक्ष वीरेंद्र भारती ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि शिक्षकों के स्वाभिमान और उनके हक की इस लड़ाई में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संगठन पीछे नहीं हटेगा और बहुत जल्द विभाग के खिलाफ आर-पार के आंदोलन की आधिकारिक घोषणा की जाएगी।

