न्यूज़ डेस्क
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन के बीच उस समय हड़कंप मच गया जब एक महिला सीएचसी अधीक्षका द्वारा पत्रकार रमेश पांडेय के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर (FIR) पर गंभीर सवाल खड़े हो गए। 20 अप्रैल की जिस कथित घटना को आधार बनाकर रिपोर्ट दर्ज कराई गई, उसकी ब्लॉक के जिम्मेदार अधिकारियों और कथित गवाहों ने ही पोल खोल दी है। मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है और पत्रकार संगठनों में भारी रोष व्याप्त है।
विरोधभास की फेहरिस्त: दावे बनाम हकीकत
अधीक्षका द्वारा दी गई तहरीर और पुलिसिया कार्रवाई में कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जो इसे “साजिश” की ओर इशारा कर रहे हैं:
| विवरण | अधीक्षका का दावा | हकीकत / गवाहों का बयान |
| बीडीओ का नाम | तहरीर में गलत नाम दर्ज | बीडीओ सूर्यप्रकाश मिश्रा ने ऐसी किसी भी घटना से इनकार किया। |
| मुख्य गवाह | पत्रकार नफीस को बनाया गवाह | नफीस ने स्पष्ट कहा कि उनके सामने ऐसी कोई घटना नहीं हुई। |
| ब्लॉक अधिकारी | घटना ब्लॉक परिसर की बताई गई | ब्लॉक के किसी भी कर्मचारी को घटना की कोई जानकारी नहीं है। |
| ANM का दबाव | पूर्व रिपोर्ट दर्ज कराने में भूमिका | चर्चा है कि ANM पर दबाव बनाकर यह खेल रचा गया है। |
बीडीओ ने खोली पोल: “मेरे सामने गाड़ी में बैठकर चली गईं”
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब बीडीओ सूर्यप्रकाश मिश्रा ने खुद सामने आकर सच्चाई बयान की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उनके सामने ही ब्लॉक प्रमुख और अधीक्षका अपनी गाड़ी में बैठकर शांतिपूर्वक चले गए थे, वहाँ किसी भी तरह का विवाद या अभद्रता नहीं हुई थी। बीडीओ के इस बयान ने एफआईआर की विश्वसनीयता को शून्य कर दिया है।
अधीक्षका का पुराना ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ भी विवादों में
सूत्रों के अनुसार, उक्त अधीक्षका पर पहले भी अपने विरोधियों और अधीनस्थ कर्मचारियों के खिलाफ फर्जी शिकायतें कराने के आरोप लग चुके हैं। आरोप है कि वे अपने पद का दुरुपयोग कर लोगों को फंसाने के लिए दबाव की राजनीति करती हैं। पत्रकार रमेश पांडेय ने इस पूरे फर्जीवाड़े के खिलाफ शासन और जिला प्रशासन को पत्र लिखकर उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
“सच्चाई को दबाने के लिए पत्रकारिता की आवाज पर हमला किया जा रहा है। जब बीडीओ और गवाह खुद मना कर रहे हैं, तो साफ है कि यह रिपोर्ट केवल निजी खुन्नस निकालने के लिए की गई है।” — स्थानीय पत्रकार संगठन
आंदोलन की चेतावनी
मामला बढ़ता देख क्षेत्र के पत्रकारों और गणमान्य नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही फर्जी रिपोर्ट को निरस्त कर अधीक्षका के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बड़े आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। प्रशासन के लिए अब यह गले की हड्डी बन गया है कि आखिर बिना जांच के इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।

