लखनऊ |
उत्तर प्रदेश में आगामी त्योहारों—होली, रमजान और चैत्र नवरात्र—के दृष्टिगत शांति और कानून-व्यवस्था को लेकर शासन पूरी तरह सतर्क है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें प्रदेश के सभी जिलों के वरिष्ठ पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों की आड़ में अराजकता फैलाने वालों के साथ ‘कतई नरमी’ न बरती जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि यदि कोई भी तत्व समाज का सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई की जाए जो पूरे प्रदेश के लिए एक ‘नजीर’ या ‘मिसाल’ बन जाए।
कानून का इकबाल और त्योहारों की मर्यादा: मुख्यमंत्री का सख्त रुख
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने जोर दिया कि उत्तर प्रदेश अब दंगों और कर्फ्यू वाले पुराने दौर को पीछे छोड़ चुका है। वर्तमान सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का ही परिणाम है कि आज प्रदेश में कानून का इकबाल कायम है। मंत्रिपरिषद के सदस्यों और शासन के आला अधिकारियों के साथ चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि त्योहारों के दौरान आम नागरिक की सुरक्षा और सुविधा में कोई चूक नहीं होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि Cabinet स्तर पर विकास की जो योजनाएं तैयार की गई हैं, उनकी सफलता के लिए शांतिपूर्ण वातावरण अनिवार्य है। मुख्यमंत्री ने पुलिस विभाग को निर्देश दिए कि संवेदनशील इलाकों में फुट पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और ‘बीट पुलिसिंग’ को और अधिक प्रभावी बनाया जाए।
सुरक्षा और सुशासन के लिए 10 बड़े निर्देश: उत्तर प्रदेश पुलिस को मिला ‘फ्री हैंड’
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बैठक के दौरान विशेष रूप से इन 10 बिंदुओं पर कड़ाई से अमल करने के आदेश दिए हैं:
- सोशल मीडिया पर ‘सर्जिकल’ नजर: भ्रामक खबरें, नफरती पोस्ट या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज कर जेल भेजने की कार्रवाई हो।
- ड्रोन और सीसीटीवी निगरानी: सभी संवेदनशील और मिश्रित आबादी वाले क्षेत्रों में ड्रोन कैमरों और पीटीजेड (PTZ) कैमरों से 24 घंटे निगरानी की जाए।
- अवैध शराब के खिलाफ अभियान: होली के दौरान जहरीली या अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए आबकारी और पुलिस विभाग संयुक्त छापेमारी करें।
- निर्बाध बिजली-पानी की आपूर्ति: त्योहारों के दौरान कटौती मुक्त बिजली और नगर निकायों द्वारा पेयजल व सफाई की सुचारू व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
- पीस कमेटी की सक्रियता: हर थाना क्षेत्र में शांति समिति की बैठकें कर धर्मगुरुओं और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाए।
- अराजक तत्वों का ‘हिस्ट्रीशीट’ चेक: पुराने उपद्रवियों और अपराधियों की सूची अपडेट कर उनके खिलाफ प्रिवेंटिव एक्शन (निरोधात्मक कार्रवाई) लिया जाए।
- धर्मस्थलों की सुरक्षा: किसी भी धार्मिक स्थल पर नई परंपरा शुरू करने की इजाजत न दी जाए और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हों।
- फायर ब्रिगेड और अस्पताल अलर्ट: आगजनी या किसी भी मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए फायर टेंडर और अस्पतालों में विशेष वार्ड तैयार रखे जाएं।
- ट्रैफिक और पार्किंग मैनेजमेंट: बाजारों में उमड़ने वाली भीड़ को देखते हुए सुव्यवस्थित पार्किंग और ट्रैफिक डायवर्जन प्लान लागू किया जाए।
- प्रशासनिक जवाबदेही: यदि कहीं भी गड़बड़ी होती है, तो संबंधित क्षेत्र के बीट इंचार्ज से लेकर जिलाधिकारी और पुलिस कप्तान तक की जवाबदेही तय होगी।
अफवाहों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और सामुदायिक समन्वय
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उल्लेख किया कि अक्सर त्योहारों के समय कुछ स्वार्थी तत्व अफवाहों के जरिए अशांति फैलाने की कोशिश करते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार का ‘मीडिया सेल’ अब ऐसी खबरों का तुरंत खंडन करने के लिए हाई-टेक तकनीकों का उपयोग कर रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि लाउडस्पीकर की आवाज सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार निर्धारित डेसीबल के भीतर ही रहे और किसी भी नए लाउडस्पीकर को लगाने की अनुमति न दी जाए।
उन्होंने कहा कि मंत्रिपरिषद का यह संकल्प है कि प्रदेश का हर नागरिक—चाहे वह किसी भी धर्म या संप्रदाय का हो—बिना किसी भय के अपना त्योहार मना सके। Cabinet द्वारा पहले ही निर्देश दिए जा चुके हैं कि त्योहारों के समय सड़कों पर कोई भी ऐसा अवरोध न हो जिससे आम जनता का रास्ता बाधित हो।
“समाज की शांति के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। प्रशासन की सतर्कता ही सुरक्षित त्योहार की गारंटी है।” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
निष्कर्ष: सुरक्षित और उल्लासपूर्ण उत्तर प्रदेश का संकल्प
अंततः, मुख्यमंत्री के ये 10 कड़े निर्देश यह सुनिश्चित करने के लिए हैं कि उत्तर प्रदेश में होली और रमजान का संगम आपसी प्रेम और सद्भाव के साथ संपन्न हो। शासन की यह सख्ती केवल अपराधियों के लिए है, जबकि आम जनता के लिए प्रशासन हर संभव मदद के लिए खड़ा है। इन दिशा-निर्देशों के लागू होने से प्रदेश के हर जिले में सुरक्षा का एक चक्रव्यूह तैयार हो गया है। आने वाले त्योहारों में यह अभेद्य सुरक्षा व्यवस्था न केवल उपद्रवियों के लिए एक मिसाल बनेगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के सुशासन की वैश्विक छवि को भी और अधिक मजबूत करेगी।

