रुदौली। सरयू नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से रुदौली तहसील क्षेत्र में बाढ़ का संकट गहरा गया है। बृहस्पतिवार दोपहर दो बजे नदी का जलस्तर 93.040 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 92.730 मीटर है। नदी खतरे के निशान से 31 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। तहसील क्षेत्र के नूरगंज, सुलेमपुर, उधरोरा, महगू पुरवा, सरायनासीर, बरई, अब्बुपुर और कैथी खास समेत कई गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासन के अनुसार करीब 845 परिवार और 3300 लोग प्रभावित हैं।
पसैया गांव में बाढ़ का पानी आठ परिवारों के घरों में घुस गया है। इसके चलते रामकरन, कुसमा, रामचंद्र, कुमारी प्रवीन, मधु, रघुराज, बुधराम और रामसरन के परिवार बंधे पर पन्नी तानकर रहने को मजबूर हैं। गृहस्थी का सामान भी पन्नी के नीचे रखा गया है।
10 साल से आवासीय पट्टे की आस
प्रभावित रामदुलारी ने बताया कि उनका मूल निवास मरौचा गांव में था। करीब 10 वर्ष पहले सरयू नदी के कटान में उनका घर नदी में समा गया था। इसके बाद परिवार को रहने के लिए कोई भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई। तब से करीब छह परिवार बंधे के पास झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं। उनका आरोप है कि हर साल बाढ़ आने पर अधिकारी और नेता मौके पर पहुंचकर समस्या सुनते हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। उन्होंने प्रशासन से आवासीय पट्टा दिए जाने की मांग की है।
रामदुलारी ने बताया कि बाढ़ का पानी घर में घुसने के बाद गृहस्थी का पूरा सामान बंधे पर पन्नी के नीचे रखना पड़ा है। एक बार राशन किट मिली थी, लेकिन अब राशन खत्म होने को है और दोबारा राशन नहीं मिला है।
बंधे पर अंधेरा, जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा
मंगला देवी ने बताया कि जलस्तर बढ़ने से उनके घर में पानी भर गया है। परिवार बंधे पर पन्नी तानकर रह रहा है। बंधे पर लगे बिजली के खंभे में रोशनी नहीं होने के कारण रात में अंधेरा रहता है। इससे जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा बना हुआ है।
छूटे परिवारों को भी मिलेगी राहत किट
एसडीएम विनोद गुप्ता ने बताया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों में 250 राशन किट का वितरण किया जा चुका है। जो परिवार राहत सामग्री से छूट गए हैं, उन्हें भी राशन किट उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि पसैया में रहने वाले परिवारों की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में यह तथ्य सामने आता है कि नदी के कटान में उनके वास्तविक आवास नदी में समा गए थे, तो नियमानुसार उन्हें आवासीय पट्टा उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

