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मदरसा या क्लीनिक? औचक जांच में ड्यूटी छोड़ मरीज देखते मिले प्रधानाचार्य, उप निदेशक ने रोका वेतन, 6 माह की GPS लोकेशन तलब

Madarsa Islamia Girdhur Principal Idris Ahmad Khan Investigation

जौनपुर | तामीर हसन शीबू (NewsHour)

जौनपुर जनपद के अनुदानित मदरसा इस्लामिया गिरधरपुर में राजकीय धन के कथित दुरुपयोग और लापरवाही का एक बेहद चौकाने वाला मामला प्रकाश में आया है। मदरसे के प्रधानाचार्य इदरीस अहमद खान पर लगे गंभीर आरोपों की जमीनी हकीकत परखने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण विभाग ने फिल्मी अंदाज में एक बड़ी ‘स्टिंग’ कार्रवाई को अंजाम दिया। शिकायत की सत्यता जांचने के लिए वाराणसी मंडल के उप निदेशक (अल्पसंख्यक कल्याण) विजय प्रताप यादव स्वयं मरीज का स्वांग रचकर, ई-रिक्शा पर सवार होकर यूसुफ रोड स्थित ‘खान क्लीनिक’ जा पहुंचे। वहां जो नजारा दिखा, उसने विभाग के दावों की पोल खोलकर रख दी; प्रधानाचार्य महोदय मदरसे में ड्यूटी के निर्धारित समय पर अपने निजी क्लीनिक में बकायदा मरीजों का इलाज करते रंगेहाथ पकड़े गए।

वेतन रोका, 6 महीने की GPS लोकेशन और CCTV फुटेज तलब

औचक निरीक्षण में प्रथम दृष्टया मामला पूरी तरह सही पाए जाने पर उप निदेशक विजय प्रताप यादव ने तत्काल कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने प्रधानाचार्य इदरीस अहमद खान के विरुद्ध विभागीय जांच (Departmental Enquiry) के कड़े आदेश जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही:

  • प्रधानाचार्य का वेतन तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया है
  • आरोपी प्रधानाचार्य के पिछले छह महीने की जीपीएस (GPS) लोकेशन रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि उनके मूवमेंट का सच सामने आ सके।
  • मदरसा परिसर और खान क्लीनिक दोनों स्थानों की पिछले महीनों की सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को भी आधिकारिक रूप से तलब कर लिया गया है।

प्रकरण, आरोप और प्रशासनिक कार्रवाई का पूरा विवरण:

मुख्य विवरणविभागीय अपडेट एवं जांच के आंकड़े
संबंधित मदरसाअनुदानित मदरसा इस्लामिया गिरधरपुर, जौनपुर
आरोपी प्रधानाचार्यइदरीस अहमद खान (BUMS डिग्री धारक)
औचक जांचकर्ता अधिकारीविजय प्रताप यादव (उप निदेशक, अल्पसंख्यक कल्याण, वाराणसी मंडल)
शिकायतकर्ताशाहिल जैदी
विभाग का कड़ा एक्शनवेतन बाधित, विभागीय जांच शुरू, जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी से रिपोर्ट तलब
छात्र संख्या में गिरावटएक ही वर्ष में छात्र संख्या 350 से घटकर मात्र 200 रह गई

फर्जी हस्ताक्षर कर वेतन लेने और परीक्षा से गायब रहने का है आरोप

शिकायतकर्ता शाहिल जैदी ने विभाग को दिए शिकायती पत्र में बेहद गंभीर आरोप लगाए थे। शिकायत के अनुसार, प्रधानाचार्य इदरीस अहमद खान नियमित रूप से मदरसे में उपस्थित नहीं होते और केवल फर्जी हस्ताक्षर (Fake Signature) बनाकर शासकीय खजाने से हर महीने मोटा वेतन डकार रहे हैं। आरोप है कि वे सुबह 10 बजे से लेकर रात 8 बजे तक अपने निजी ‘खान क्लीनिक’ में ही बैठते हैं। उनके पास बीयूएमएस (BUMS) की डिग्री है और क्लीनिक के लेटरपैड पर भी उनका नाम व डिग्री बकायदा अंकित है।

  • बोर्ड परीक्षा से भी रहे नदारद: शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि बीते 10 फरवरी को मदरसा शिक्षा परिषद की मुख्य परीक्षा के दौरान उन्हें सहायक केंद्र व्यवस्थापक की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन वे उस महत्वपूर्ण ड्यूटी से भी अनुपस्थित पाए गए थे। उस समय उच्चाधिकारियों द्वारा एफआईआर (FIR) दर्ज कराने के कड़े निर्देश दिए गए थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर सांठगांठ के चलते आगे कोई कार्रवाई नहीं हो सकी थी।
  • पुत्र ही हैं मदरसे के प्रबंधक: इस पूरे खेल में पारिवारिक गठजोड़ भी सामने आया है। मदरसे के प्रबंधक कोई और नहीं, बल्कि प्रधानाचार्य के पुत्र मोहम्मद जाहिद खान हैं। आरोप है कि पिता-पुत्र की इस जोड़ी के कारण प्रधानाचार्य वर्षों से घर बैठे ही अपनी उपस्थिति दर्ज करवा रहे थे, जिसमें मदरसे के क्लर्क (बाबू) की भूमिका भी संदिग्ध है। इस घोर लापरवाही के चलते मदरसे में पंजीकृत छात्रों की संख्या भी महज एक वर्ष के भीतर 350 से घटकर लगभग 200 के करीब सिमट गई है।

पूर्वांचल के 7 जिलों के मदरसों की जांच के निर्देश; मची खलबली

जौनपुर के इस बड़े मामले को नजीर बनाते हुए उप निदेशक ने अब पूरे वाराणसी और आजमगढ़ मंडल में शिकंजा कस दिया है। उन्होंने जौनपुर के अलावा मऊ, बलिया, आजमगढ़, गाजीपुर, चंदौली और वाराणसी के अनुदानित मदरसों की भी सघन विधिक जांच के आदेश दे दिए हैं। उन्होंने साफ कहा है कि यदि राजकीय धन के दुरुपयोग, फर्जी हाजिरी या वित्तीय गबन के आरोप किसी भी मदरसे में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित के खिलाफ रिकवरी और निलंबन जैसी कठोरतम विधिक कार्रवाई की जाएगी।

प्रधानाचार्य की सफाई— “मैं तो खुद दवा लेने गया था”

दूसरी ओर, आरोपों के घेरे में आए प्रधानाचार्य इदरीस अहमद खान ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार और राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने विभागीय टीम को सफाई देते हुए दावा किया:

“औचक निरीक्षण के दिन मेरी तबीयत अचानक खराब हो गई थी, जिसके कारण मैं स्वयं दवा लेने के लिए क्लीनिक गया था। इस क्लीनिक का पूरा संचालन मेरा बेटा करता है, मैं नहीं। मैं नियमित रूप से मदरसे जाता हूं और वहां बकायदा बायोमेट्रिक उपस्थिति (Biometric Attendance) दर्ज कराता हूँ।” — इदरीस अहमद खान, प्रधानाचार्य

इस संबंध में जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी अनीता ने बताया कि प्रधानाचार्य एवं प्रबंधक दोनों को कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) जारी कर स्पष्टीकरण मांगा गया है।

जांच अधिकारी पर ही संरक्षण देने के आरोप; चर्चाएं तेज

इस बीच, विभाग द्वारा शुरू की गई इस जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर भी स्थानीय स्तर पर कानाफूसी और चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कुछ सूत्रों का दबी जुबान में दावा है कि जौनपुर में इस मामले की जांच स्थानीय स्तर पर ऐसे अधिकारी को सौंप दी गई है, जिन पर पहले से ही इस पूरे प्रकरण में आरोपी प्रधानाचार्य को पर्दे के पीछे से संरक्षण (Protection) देने के आरोप लगते रहे हैं। हालांकि, इस दावे की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और न ही संबंधित जांच अधिकारियों की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।

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