रुदौली (अयोध्या) | विशेष रिपोर्ट (NewsHour)
अयोध्या जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) रुदौली में एक गर्भवती महिला की मेडिकल जांच रिपोर्ट को लेकर बेहद चौकाने वाला और गंभीर मामला प्रकाश में आया है। सरकारी अस्पताल की पैथोलॉजी में जांच होने के बावजूद, वहां तैनात महिला चिकित्सक द्वारा वही जांच दोबारा बाहर की एक निजी पैथोलॉजी से कराने के लिए लिखे जाने और फिर दोनों रिपोर्टों के नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर मिलने से स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप मच गया है। इस पूरे प्रकरण की गंभीरता और परिजनों के आक्रोश को देखते हुए मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने जांच टीम गठित कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
क्या है पूरा मामला? रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन और शुगर का बड़ा खेल
प्राप्त जानकारी के अनुसार, रुदौली क्षेत्र के बेतौली गांव निवासी प्रदीप अपनी 29 वर्षीय गर्भवती पत्नी सिन्की को आगामी प्रसव संबंधी आवश्यक जांचों के लिए बीते 24 जून को सीएचसी रुदौली लेकर पहुंचे थे। परिजनों का आरोप है कि वहां ओपीडी में तैनात डॉ. फातिमा हसन ने प्रसूता को देखने के बाद पहले सीएचसी की ही सरकारी पैथोलॉजी में खून की जांच कराने को कहा।
सरकारी लैब से आई रिपोर्ट में सिन्की का हीमोग्लोबिन (Hb) 10.4 ग्राम और ब्लड शुगर 96 दर्ज किया गया, जो कि सामान्य श्रेणी के करीब था। लेकिन, आरोप है कि डॉ. फातिमा हसन ने इस रिपोर्ट को दरकिनार करते हुए मरीज को वही जांच बाहर की एक निजी पैथोलॉजी से कराने का पर्चा थमा दिया।
दोनों पैथोलॉजी की रिपोर्ट में हैरान करने वाला अंतर:
| जांच का प्रकार | सीएचसी (सरकारी लैब) की रिपोर्ट | निजी पैथोलॉजी (बाहर) की रिपोर्ट | परिणाम |
| हीमोग्लोबिन (Hb) | 10.4 ग्राम (सुरक्षित स्तर) | 7.4 ग्राम (अत्यधिक गंभीर/एनीमिक) | 3.0 ग्राम का भारी अंतर |
| ब्लड शुगर | 96 | 85 | 11 अंकों का अंतर |
चिकित्सक के निर्देश पर जब परिजनों ने बाहर की निजी पैथोलॉजी से जांच कराई, तो वहां की रिपोर्ट देखकर उनके होश उड़ गए। बाहर की रिपोर्ट में हीमोग्लोबिन घटकर मात्र 7.4 ग्राम और ब्लड शुगर 85 आया। एक ही समय पर एक ही मरीज की दो अलग-अलग रिपोर्टों में इतना बड़ा अंतर आने से सरकारी डॉक्टरों की कार्यप्रणाली और जांच की विश्वसनीयता पर गंभीर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं।
सीएचसी अधीक्षक डॉ. रवींद्र शुक्ला ने सीएमओ को भेजी रिपोर्ट
इस गंभीर गड़बड़ी और कमीशनखोरी के आरोपों के बीच सीएचसी अधीक्षक डॉ. रवींद्र शुक्ला ने त्वरित संज्ञान लिया है। उन्होंने मीडिया को बताया कि दोनों रिपोर्टों में हीमोग्लोबिन और शुगर के स्तर में वास्तव में बड़ा और तकनीकी अंतर है। सरकारी लैब में जहाँ प्रसूता सुरक्षित दिख रही है, वहीं निजी लैब उसे अत्यधिक खून की कमी (एनीमिया) की श्रेणी में दिखा रही है। इस पूरे संवेदनशील मामले की विस्तृत और तथ्यात्मक रिपोर्ट बनाकर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) अयोध्या को आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित कर दी गई है।
बॉक्स: सीएमओ डॉ. देवेंद्र भदौरिया ने दिए कड़े जांच के आदेश
“सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में जब सभी प्रकार की आधुनिक जांच सुविधाएं पूरी तरह निशुल्क उपलब्ध हैं, तो मरीजों की जांचें अनिवार्य रूप से सरकारी अस्पताल में ही कराई जानी चाहिए। यदि किसी भी चिकित्सक ने बिना किसी उचित या आपातकालीन कारण के मरीज को बाहर की निजी पैथोलॉजी में जांच के लिए रेफर किया है, तो यह बेहद गंभीर और सेवा नियमावली का उल्लंघन है। पूरे प्रकरण की निष्पक्षता से जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की जा रही है। जांच रिपोर्ट आते ही जो भी डॉक्टर या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कठोर दंडात्मक और विभागीय कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”
— जी. डॉ. देवेंद्र भदौरिया, मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO), अयोध्या

