बीकापुर (अयोध्या) | राजनीतिक ब्यूरो (NewsHour)
उत्तर प्रदेश की बीकापुर विधानसभा सीट पर आगामी चुनावी हलचल के बीच राजनीतिक बिसात बिछनी शुरू हो गई है। चुनावी शोर-शराबे और अत्यधिक भीड़भाड़ की चकाचौंध से दूर, बीकापुर विधानसभा से समाजवादी पार्टी (SP) के पूर्व प्रत्याशी हाजी फिरोज़ खान उर्फ़ गब्बर इन दिनों क्षेत्र में एक अलग और अनूठे अंदाज में नजर आ रहे हैं। वे बिना किसी तड़क-भड़क के सीधे क्षेत्र के बुजुर्गों, सम्मानित नागरिकों और आमजन के बीच पहुंचकर उनका आशीर्वाद एवं स्नेह प्राप्त कर रहे हैं। उनका यह शांत, संयमित और सकारात्मक जनसंपर्क अभियान इस समय समूचे क्षेत्र में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है।
वरिष्ठ समाजसेवी घनश्याम मुरारी वर्मा से की शिष्टाचार भेंट
इसी क्रम में हाजी फिरोज़ खान गब्बर ने बीकापुर पहुंचकर क्षेत्र के सम्मानित व वरिष्ठ समाजसेवी घनश्याम मुरारी वर्मा से शिष्टाचार भेंट की और पैर छूकर उनका आशीर्वाद लिया। इस मुलाकात के दौरान क्षेत्र के विकास और वर्तमान राजनीतिक समीकरणों पर लंबी चर्चा हुई। गब्बर के सरल और सहज व्यवहार से प्रभावित होकर वरिष्ठ समाजसेवी घनश्याम मुरारी वर्मा ने उनके पक्ष में एक बड़ा और सकारात्मक बयान देते हुए कहा:
“हाजी फिरोज़ खान गब्बर का राजनीतिक अनुभव और जनता के प्रति समर्पण सराहनीय है। बीकापुर की देवतुल्य जनता को एक बार इन्हें भी अपनी सेवा का पूरा अवसर देना चाहिए।” — घनश्याम मुरारी वर्मा, वरिष्ठ समाजसेवी
जनसंपर्क अभियान और राजनीतिक समीकरणों का पूरा लेखा-जोखा:
| मुख्य विवरण | राजनीतिक अपडेट एवं समीकरण |
| प्रमुख चेहरा | हाजी फिरोज़ खान उर्फ़ ‘गब्बर’ (पूर्व प्रत्याशी, समाजवादी पार्टी) |
| विधानसभा क्षेत्र | बीकापुर (जनपद अयोध्या) |
| मुलाकात/आशीर्वाद | वरिष्ठ समाजसेवी घनश्याम मुरारी वर्मा |
| राजनीतिक शैली | बिना शोर-शराबे के सभी वर्गों और धर्मों से सीधा संवाद |
| गलियारों में चर्चा | BSP प्रत्याशी के खिलाफ सपा की ओर से सबसे मजबूत और कड़े दावेदार |
बसपा (BSP) प्रत्याशी की घोषणा के बाद गब्बर ही सबसे मजबूत दावेदार!
राजनीतिक गलियारों और बीकापुर की जनता के बीच इस बात की चर्चा बेहद तेज है कि बहुजन समाज पार्टी (BSP) द्वारा बीकापुर विधानसभा में अपना प्रत्याशी घोषित किए जाने के बाद, अब समाजवादी पार्टी की ओर से केवल हाजी फिरोज़ खान गब्बर ही ऐसे नेता हैं जो सामने वाले खेमे को सबसे मजबूत और कड़ी शिकस्त देने की क्षमता रखते हैं।
जनता के बीच अपनी चौबीसों घंटे सक्रियता, सहज व्यवहार और लंबे राजनीतिक अनुभव के लिए पहचाने जाने वाले गब्बर समाज के हर तबके—चाहे वो युवा हों, बुजुर्ग हों, या किसी भी धर्म-जाति के लोग हों—सभी से सीधा और आत्मीय संवाद स्थापित कर रहे हैं। आशीर्वाद, अटूट विश्वास और इस मौन जनसंपर्क की यात्रा को क्षेत्र की जनता बेहद गंभीरता से देख रही है, जिसने विरोधी खेमों में भी हलचल पैदा कर दी है।

