बाराबंकी | न्यूज़ डेस्क (NewsHour)
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (RED) के अंतर्गत एक कनिष्ठ लिपिक (Junior Clerk) के स्थानांतरण (Transfer) के बावजूद उसे अब तक कार्यमुक्त (Relieve) न किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। यह प्रकरण इस समय विभागीय गलियारों और प्रशासनिक हल्के में भारी चर्चा का विषय बना हुआ है। आरोप लग रहे हैं कि विभागीय स्तर पर साठगांठ कर जानबूझकर रिलीविंग की वैधानिक प्रक्रिया में देरी की जा रही है, ताकि संबंधित रसूखदार कर्मचारी को अपना स्थानांतरण आदेश रुकवाने या निरस्त कराने का पर्याप्त अवसर मिल सके।
8 वर्षों से एक ही सीट पर जमे थे लिपिक, शिकायतों के बाद हुआ था तबादला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरईडी विभाग में कार्यरत कनिष्ठ लिपिक मुकेश कुमार का हाल ही में शासन के निर्देश पर प्रशासनिक आधार पर पड़ोसी जनपद अमेठी के लिए स्थानांतरण किया गया था। बताया जाता है कि मुकेश कुमार पिछले करीब आठ वर्षों से बाराबंकी में एक ही स्थान पर मलाईदार सीट पर तैनात रहे हैं।
इस लंबी अवधि के दौरान उनकी कार्यशैली और कार्यप्रणाली को लेकर विभिन्न स्तरों पर गंभीर शिकायतें भी दर्ज की गई थीं, जिसका संज्ञान लेते हुए उच्चाधिकारियों द्वारा उनका तबादला गैर-जनपद किया गया था।
प्रकरण की मुख्य कड़ियाँ और वर्तमान स्थिति:
| मुख्य विवरण | प्रशासनिक अपडेट व आंकड़े |
| संबंधित कर्मचारी | मुकेश कुमार, कनिष्ठ लिपिक (Junior Clerk) |
| विभाग का नाम | ग्रामीण अभियंत्रण विभाग (RED), बाराबंकी |
| नया तैनाती स्थल | जनपद अमेठी (प्रशासनिक आधार पर ट्रांसफर) |
| आरोप की अवधि | पिछले 8 वर्षों से एक ही स्थान पर थे जमे |
| विभागीय रुख | अधीक्षण अभियंता के.के. मिश्रा ने कहा— “शीघ्र होगी रिलीविंग” |
“ट्रांसफर निरस्त करा लूँगा…” लिपिक के दावे से शासन की मंशा पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक, स्थानांतरण आदेश जारी होने के कई दिन बीत जाने के बाद भी स्थानीय कार्यालय की ओर से उन्हें अभी तक कार्यमुक्त नहीं किया गया है। विभागीय गलियारों में दबी जुबान में यह चर्चा आम है कि संबंधित कर्मचारी स्वयं खुलेआम यह दावा कर रहा है कि वह ऊंचे संपर्कों के दम पर अपना स्थानांतरण निरस्त करा लेगा। यही मुख्य कारण है कि स्थानीय स्तर पर रिलीविंग प्रक्रिया को जानबूझकर ठंडे बस्ते में लटका कर रखा गया है।
इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच और त्वरित कार्रवाई को लेकर मुख्यमंत्री (CM) स्तर तक लिखित शिकायत किए जाने की भी चर्चाएं तेज हैं। विभागीय सूत्रों का साफ कहना है कि स्थानांतरण आदेश के अनुपालन में अनावश्यक देरी से ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली शासन की नीति और मंशा पर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। नियमानुसार, आदेश जारी होते ही कर्मचारी को तत्काल कार्यमुक्त किया जाना चाहिए था।
अधीक्षण अभियंता के.के. मिश्रा ने कहा— “होगी कड़ी कार्रवाई”
इस गंभीर और विवादित मामले को लेकर जब अयोध्या मंडल के अधीक्षण अभियंता (Superintending Engineer) के.के. मिश्रा से सीधे बात की गई, तो उन्होंने सख्त लहजे में अपनी बात रखी।
“कनिष्ठ लिपिक का स्थानांतरण आदेश पूरी तरह प्रभावी है और इसे रोकने या टालने जैसी कोई भी बात संज्ञान में नहीं है। कार्यमुक्त किए जाने की विधिक प्रक्रिया को शीघ्र ही धरातल पर पूरा कराया जाएगा। इसके साथ ही, स्थानांतरण आदेश के बावजूद अब तक रिलीविंग क्यों नहीं की गई, इसकी पूरी रिपोर्ट स्थानीय कार्यालय से तलब की जा रही है। जानकारी प्राप्त कर आवश्यक वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।” — के.के. मिश्रा, अधीक्षण अभियंता (अयोध्या मंडल)
अब क्षेत्र के विभागीय कर्मचारियों और आम लोगों के बीच इस बात को लेकर तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आरोपी कर्मचारी को अमेठी के लिए कब तक कार्यमुक्त किया जाता है और उच्चाधिकारी इस पूरे प्रकरण में लापरवाही बरतने वाले स्थानीय बाबू और अधिकारियों पर क्या रुख अपनाते हैं।

