उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी परियोजना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) अपने पहले चरण के उद्घाटन की दहलीज पर खड़ा है। ताजा अपडेट के अनुसार, एयरपोर्ट के पहले चरण का लगभग 95 प्रतिशत निर्माण कार्य संपन्न हो चुका है। शेष 5 प्रतिशत कार्य को 10 नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसके बाद यहाँ से वाणिज्यिक उड़ानें शुरू हो सकेंगी।
चरण-1: क्षमता और संचालन की मुख्य बातें
पहले चरण में एयरपोर्ट को एक रनवे के साथ संचालित किया जाएगा। इसकी शुरुआती क्षमता और बुनियादी ढांचा कुछ इस प्रकार है:
- यात्री क्षमता: सालाना 1 करोड़ 20 लाख यात्री।
- दैनिक उड़ानें: औसतन 150 उड़ानों का संचालन प्रतिदिन होगा।
- विस्तार का ट्रिगर: जैसे ही यात्रियों की संख्या 1 करोड़ प्रति वर्ष को पार करेगी, तत्काल दूसरे रनवे का निर्माण शुरू कर दिया जाएगा। दो रनवे होने पर यह क्षमता बढ़कर 7 करोड़ हो जाएगी।
निवेश और बुनियादी ढांचा
| विवरण | सांख्यिकी / लागत |
| पहले चरण का क्षेत्रफल | 3,300 एकड़ |
| कुल प्रस्तावित क्षेत्रफल | 11,750 एकड़ |
| भूमि अधिग्रहण लागत | ₹5,000 करोड़ |
| निर्माण लागत (चरण-1) | ₹7,000 करोड़ |
| अंतिम लक्ष्य (रनवे) | कुल 5 रनवे |
दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में होगा शामिल
जेवर एयरपोर्ट केवल यूपी ही नहीं, बल्कि दुनिया के नक्शे पर भारत की चमक बढ़ाएगा। परियोजना के पूर्ण होने पर यहाँ कुल 5 रनवे होंगे और इसकी वार्षिक क्षमता 30 करोड़ यात्रियों तक पहुँच जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर बढ़ते दबाव को 30-40% तक कम किया जा सकेगा।
आर्थिक क्रांति का आधार
एयरपोर्ट के आसपास का क्षेत्र केवल उड़ानों तक सीमित नहीं रहेगा। यहाँ लॉजिस्टिक्स हब, पर्यटन केंद्र, और बड़े औद्योगिक गलियारे विकसित किए जा रहे हैं। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे, जिससे यह क्षेत्र ‘वैश्विक निवेश’ का नया केंद्र बनेगा।








