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Kashi Beats China: काशी ने रचा इतिहास! 1 घंटे में रोपे 2.5 लाख से ज्यादा पौधे, चीन का 8 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ बनाया ‘गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड’

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वाराणसी/लखनऊ | प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन में वाराणसी ने रविवार को पर्यावरण संरक्षण का एक नया वैश्विक कीर्तिमान स्थापित किया है। सुजाबाद डोमरी के 350 बीघा क्षेत्र में आयोजित इस महाभियान में काशीवासियों ने एकजुट होकर महज 60 मिनट में 2,51,446 पौधों का रोपण किया। इसके साथ ही चीन द्वारा 2018 में बनाया गया 1,53,981 पौधों का रिकॉर्ड अब इतिहास बन गया है।

सटीक गणना और रिकॉर्ड की घोषणा

​गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के निर्णायक ऋषि नाथ और रणनीतिकार निश्चल बारोट की देखरेख में पूरे कार्यक्रम की डिजिटल मॉनिटरिंग की गई। ड्रोन कैमरों और आधुनिक गणना तंत्र के जरिए पुष्टि होने के बाद, ऋषि नाथ ने आधिकारिक रूप से नए विश्व रिकॉर्ड की घोषणा की और महापौर अशोक कुमार तिवारी व नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल को प्रमाणपत्र सौंपा।

‘मिनी काशी’ के स्वरूप में सजा ‘शहरी वन’

​यह केवल पौधरोपण नहीं, बल्कि काशी की संस्कृति का प्रतिबिंब है:

  • घाटों के नाम पर सेक्टर: पूरे वन क्षेत्र को 60 सेक्टरों में बांटा गया है, जिनके नाम दशाश्वमेध, मणिकर्णिका, ललिता जैसे प्रसिद्ध गंगा घाटों पर रखे गए हैं।
  • विविधता: यहाँ शीशम, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ फलदार और औषधीय पौधे (अश्वगंधा, गिलोय) लगाए गए हैं।
  • जापानी तकनीक: यहाँ मियावाकी तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे ये पौधे सामान्य से 10 गुना तेजी से बढ़ेंगे और मात्र 2-3 वर्षों में यह क्षेत्र एक घना ‘ऑक्सीजन बैंक’ बन जाएगा।

जनभागीदारी का महाकुंभ

​इस रिकॉर्ड को बनाने के लिए सेना के जवानों से लेकर छोटे बच्चों तक ने पसीना बहाया:

  • सुरक्षा बल: भारतीय सेना (39 GTC, 34 GTC), NDRF, CRPF, PAC और यूपी पुलिस के जवानों ने अनुशासन के साथ रोपण किया।
  • युवा शक्ति: काशी विद्यापीठ, यूपी कॉलेज और विभिन्न स्कूलों के हजारों छात्र-छात्राओं, NCC कैडेट्स और NSS स्वयंसेवकों ने इसे जन-आंदोलन बना दिया।
  • स्मार्ट सिंचाई: पौधों को जीवित रखने के लिए 10,827 मीटर लंबी पाइपलाइन, 10 बोरवेल और 360 ‘रेन गन’ सिस्टम लगाए गए हैं।

आर्थिक लाभ भी मिलेगा

​यह प्रोजेक्ट पर्यावरण के साथ-साथ नगर निगम की आय का भी जरिया बनेगा। एक समझौते के तहत, तीसरे वर्ष से निगम को 2 करोड़ रुपये और सातवें वर्ष तक 7 करोड़ रुपये वार्षिक की आय होने की संभावना है।

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