लोकप्रिय ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Meesho को आयकर विभाग से भारी-भरकम टैक्स डिमांड का सामना करना पड़ा है। असेसमेंट ईयर 2023-24 (वित्तीय वर्ष 2022-23) के लिए कंपनी को करीब 1,499.73 करोड़ रुपये का डिमांड नोटिस जारी किया गया है। विभाग ने कंपनी पर अपनी वास्तविक आय को कम करके दिखाने (Under-reporting of Income) का आरोप लगाया है।
क्या है पूरा विवाद?
आमतौर पर ई-कॉमर्स कंपनियों और टैक्स विभाग के बीच विवाद के मुख्य कारण निम्नलिखित होते हैं:
- मार्केटिंग खर्च: कंपनियां ग्राहकों को दिए जाने वाले डिस्काउंट और विज्ञापन खर्च को ‘व्यापारिक खर्च’ के रूप में दिखाती हैं ताकि टैक्स कम लगे, लेकिन विभाग इसे पूरी तरह स्वीकार नहीं करता।
- असेसमेंट ऑर्डर: विभाग ने Section 143(3) के तहत विस्तृत जांच के बाद यह आदेश जारी किया है, जिसमें ब्याज की राशि भी शामिल है।
पुराना मामला और कर्नाटक हाई कोर्ट का रुख
यह पहली बार नहीं है जब मीशो टैक्स के शिकंजे में आई है:
- AY 2022-23 का मामला: पिछले साल भी कंपनी को करीब ₹572 करोड़ का ऐसा ही नोटिस मिला था।
- अदालत की रोक: कंपनी ने उस आदेश को कर्नाटक हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर 17 अप्रैल 2025 को कोर्ट ने अंतरिम रोक लगा दी थी। फिलहाल वह मामला अभी विचाराधीन है।
कंपनी का आधिकारिक बयान
7 मार्च 2026 को स्टॉक एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी देते हुए मीशो ने कहा:
“हम आयकर विभाग के इन निष्कर्षों और एडजेस्टमेंट से सहमत नहीं हैं। हमारे पास इस मांग को चुनौती देने के लिए पर्याप्त कानूनी और तथ्यात्मक आधार हैं। कंपनी अपने हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कानूनी कदम उठाएगी।”
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि इस नोटिस से उनके वर्तमान बिजनेस ऑपरेशंस या वित्तीय स्थिति पर कोई तत्काल प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।





