छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में आजीविका संवर्धन की दिशा में एक क्रांतिकारी पहल की गई है। जिले के नगरी वनांचल क्षेत्र को ‘मखाना हब’ के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू हो चुकी है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय किसानों और विशेषकर महिला स्व-सहायता समूहों (SHGs) को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।
केंद्रीय कृषि मंत्री की घोषणा पर अमल
उल्लेखनीय है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने धमतरी प्रवास के दौरान जिले को ‘मखाना बोर्ड’ में शामिल करने की महत्वपूर्ण घोषणा की थी। इसी के पालन में जिला प्रशासन ने एक ठोस कार्ययोजना तैयार की है:
- लक्ष्य: जिले में कुल 100 एकड़ भूमि को मखाना उत्पादन के लिए चिन्हांकित किया गया है।
- शुरुआत: प्रथम चरण में संकरा क्षेत्र के 25 एकड़ रकबे में खेती की तैयारियां युद्ध स्तर पर शुरू हो गई हैं।
न्यूनतम खर्च, अधिकतम लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, नगरी क्षेत्र की जलवायु, प्राकृतिक वातावरण और जल की उपलब्धता मखाना के लिए पूरी तरह अनुकूल है। मखाना की खेती की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें न्यूनतम खर्च आता है क्योंकि पिछली फसल के बचे हुए बीजों से ही नए पौधे अंकुरित हो जाते हैं। यह एक बेहतरीन नकदी फसल है जो किसानों की आय दोगुनी करने की क्षमता रखती है।
कलेक्टर का ‘मॉडल धमतरी’ विजन
धमतरी कलेक्टर ने स्वयं संकरा पहुँचकर तैयारियों का जायजा लिया और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए:
- तकनीकी प्रशिक्षण: कृषि और उद्यानिकी विभाग समन्वय बनाकर समूहों को उन्नत प्रशिक्षण और गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराएंगे।
- मार्केटिंग: उत्पादित मखाने के लिए उचित विपणन (Marketing) की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।
- विस्तार: आने वाले समय में चरणबद्ध तरीके से मखाना खेती के रकबे को और अधिक बढ़ाया जाएगा।







