मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे का दूसरा दिन उत्तर प्रदेश के लिए ‘तकनीकी क्रांति’ के संकेत दे रहा है। टोक्यो में मुख्यमंत्री ने जापान के प्रमुख व्यापारिक महासंघ और वैश्विक दिग्गज मित्सुई एंड कंपनी (Mitsui & Co.) के शीर्ष प्रबंधन के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की। इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश को भारत के अगले ‘आईटी और मैन्युफैक्चरिंग सुपरपावर’ के रूप में पेश किया।
भविष्य की तकनीक पर केंद्रित चर्चा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मित्सुई के प्रबंधन के बीच हुई वार्ता का केंद्र बिंदु वे क्षेत्र रहे जो आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को संचालित करेंगे। मुख्यमंत्री ने कंपनी को इन क्षेत्रों में निवेश के लिए आमंत्रित किया:
- सेमीकंडक्टर्स (Semiconductors): भारत सरकार की सेमीकंडक्टर नीति के साथ तालमेल बिठाते हुए यूपी में चिप निर्माण की संभावनाओं पर चर्चा।
- डेटा सेंटर्स (Data Centers): नोएडा और ग्रेटर नोएडा को दक्षिण एशिया का डेटा हब बनाने की दिशा में मित्सुई के सहयोग पर मंथन।
- नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy): सोलर और ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स के जरिए यूपी के कार्बन न्यूट्रल लक्ष्यों को हासिल करना।
- सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT): उत्तर प्रदेश के युवाओं के लिए हाई-टेक रोजगार सृजन और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार।
नवाचार और वैश्विक साझेदारी को बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने मित्सुई प्रबंधन को आश्वस्त किया कि उत्तर प्रदेश में निवेश केवल एक व्यापारिक समझौता नहीं, बल्कि एक ‘परिवर्तनकारी साझेदारी’ होगी। उन्होंने कहा, “यूपी में विकास, नवाचार और वैश्विक साझेदारी के लिए अनुकूलतम माहौल है। मित्सुई जैसी कंपनी का अनुभव और तकनीक यूपी की प्रगति को नई ऊंचाई देंगे।”
जापानी निवेशकों का यूपी पर भरोसा
बैठक के दौरान मित्सुई के प्रबंधन ने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक पारदर्शिता और निवेश-हितैषी नीतियों की सराहना की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मित्सुई उत्तर प्रदेश के सेमीकंडक्टर और आईटी क्षेत्र में उतरता है, तो यह राज्य के लिए अब तक का सबसे बड़ा तकनीकी निवेश साबित हो सकता है।








