लखनऊ |
उत्तर प्रदेश में गोवंश संरक्षण और पशुधन विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 21 मार्च 2026 को अपने सरकारी आवास ‘5-कालिदास मार्ग’ पर एक हाई-लेवल बैठक की अध्यक्षता की। इस महत्वपूर्ण बैठक में पशुधन मंत्री, कृषि उत्पादन आयुक्त (APC), अपर मुख्य सचिव (पशुधन), निदेशक (पशुपालन) के साथ-साथ उत्तर प्रदेश गो-सेवा आयोग के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और समस्त सदस्यों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि गो-सेवा केवल एक धार्मिक कार्य नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की आधारशिला है। उन्होंने आयोग के सदस्यों को निर्देश दिए कि वे जमीनी स्तर पर जाकर गोशालाओं की स्थिति सुधारें और निराश्रित गोवंश के संरक्षण के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाएं।
आत्मनिर्भर गोशालाएं और आर्थिक मॉडल: मुख्यमंत्री के कड़े निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गो-सेवा आयोग के पदाधिकारियों से कहा कि अब समय आ गया है जब गोशालाओं को ‘आत्मनिर्भर’ बनाया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि गोमूत्र और गोबर से बनने वाले उत्पादों (जैसे प्राकृतिक खाद, अगरबत्ती और दीये) के विपणन (Marketing) के लिए एक सुदृढ़ तंत्र विकसित किया जाए।
बैठक के प्रमुख रणनीतिक बिंदु:
- निराश्रित गोवंश संरक्षण: सड़कों और खेतों में घूम रहे निराश्रित गोवंश को तत्काल गो-आश्रय स्थलों तक पहुँचाने और उनके चारे-पानी की उचित व्यवस्था करने के निर्देश।
- सहभागिता योजना: ‘मुख्यमंत्री निराश्रित गोवंश सहभागिता योजना’ के तहत पालकों को दी जाने वाली धनराशि का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करना।
- नस्ल सुधार: प्रदेश में स्वदेशी नस्ल के गोवंश के संवर्धन के लिए कृत्रिम गर्भाधान और ‘सेक्स सॉर्टेड सीमेन’ तकनीक के व्यापक प्रचार-प्रसार पर जोर।
प्रशासनिक जवाबदेही: आयोग और विभाग के बीच बेहतर समन्वय
मुख्यमंत्री ने पशुधन विभाग के अधिकारियों और गो-सेवा आयोग के सदस्यों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आयोग के सदस्यों को जनपदों का नियमित भ्रमण करना चाहिए और गोशालाओं की कमियों को दूर करने के लिए मौके पर ही निर्देश देने चाहिए।
बैठक में उपस्थित प्रमुख प्रशासनिक ढांचा:
| पदनाम | मुख्य जिम्मेदारी/चर्चा का विषय |
| पशुधन मंत्री | नीतिगत क्रियान्वयन और विभागीय बजट की समीक्षा। |
| कृषि उत्पादन आयुक्त (APC) | कृषि और पशुपालन के बीच समन्वय और ग्रामीण आय बढ़ाना। |
| अपर मुख्य सचिव (पशुधन) | गो-आश्रय स्थलों के लिए फंड का आवंटन और प्रशासनिक मुस्तैदी। |
| अध्यक्ष, गो-सेवा आयोग | आयोग की सक्रियता और जनपदों में गो-सेवा की स्थिति पर रिपोर्ट। |
सुशासन और सेवा का संकल्प: “हर गोवंश का संरक्षण हमारी जिम्मेदारी”
मुख्यमंत्री ने बैठक में भावुक होते हुए कहा कि गोमाता की सेवा भारतीय संस्कृति का मूल है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी गो-आश्रय स्थल पर लापरवाही के कारण गोवंश को असुविधा हुई, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मंत्रिपरिषद के सदस्यों को भी इस अभियान से जुड़ने और अपने क्षेत्रों में गो-सेवा के कार्यों की निगरानी करने को कहा गया है। Cabinet द्वारा स्वीकृत बजट का सदुपयोग करते हुए प्रदेश में नई ‘आदर्श गोशालाएं’ (Model Gaushalas) बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जहाँ दूध उत्पादन के साथ-साथ प्राकृतिक खेती के लिए खाद का निर्माण भी होगा।
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि गर्मी के मौसम को देखते हुए सभी गोशालाओं में पर्याप्त हरा चारा, भूसा और पेयजल की व्यवस्था अभी से कर ली जाए। उन्होंने गो-सेवा आयोग के उपाध्यक्ष और सदस्यों से कहा कि वे जिलों में ‘प्रभारी’ के रूप में कार्य करें और जनता को गो-संरक्षण के प्रति जागरूक करें।
“गो-सेवा और संरक्षण हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। गोशालाओं को केवल सरकारी सहायता पर निर्भर न रहकर स्वावलंबन का केंद्र बनना होगा।” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
निष्कर्ष: ग्रामीण समृद्धि का नया मार्ग
अंततः, 5-कालिदास मार्ग पर हुई यह बैठक उत्तर प्रदेश में पशुधन और गो-सेवा के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव का संकेत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कड़े रुख और स्पष्ट दिशा-निर्देशों से यह साफ है कि आने वाले समय में प्रदेश की गोशालाएं आर्थिक गतिविधियों का केंद्र बनेंगी। Uttar Pradesh News के इस विशेष घटनाक्रम ने यह सिद्ध कर दिया है कि सुशासन केवल फाइलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह मूक गोवंश की सेवा और किसान की समृद्धि तक फैला हुआ है। गो-सेवा आयोग के सदस्यों की सक्रियता अब धरातल पर दिखाई देगी, जिससे प्रदेश का पशुधन और अधिक सशक्त होगा।








