अयोध्या |
उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या आज एक ऐसे आध्यात्मिक और संवैधानिक संगम की साक्षी बनी, जो युगों-युगों तक याद रखा जाएगा। हिंदू नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के पावन प्रथम दिन, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू ने श्री राम जन्मभूमि मंदिर परिसर के नवनिर्मित द्वितीय तल पर ‘श्रीराम यंत्र’ की विधि-विधान से स्थापना की। इस अवसर पर उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यंत्र का पूजन कर राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की। राष्ट्रपति के साथ राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उपस्थित रहे। यंत्र स्थापना के पश्चात, राष्ट्रपति ने गर्भगृह में विराजित बालक राम (श्री रामलला) के दर्शन-पूजन किए और उनकी आरती उतारकर श्रद्धा निवेदित की।
श्रीराम यंत्र स्थापना: आध्यात्मिक ऊर्जा का नया केंद्र
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा की गई ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना को राम मंदिर के वास्तुशास्त्रीय और आध्यात्मिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
- द्वितीय तल की महत्ता: मंदिर का दूसरा तल अपनी विशेष नक्काशी और आध्यात्मिक संरचना के लिए जाना जाता है। यहाँ यंत्र की स्थापना से मंदिर की ऊर्जा शक्ति में वृद्धि होने की मान्यता है।
- वैदिक अनुष्ठान: राष्ट्रपति ने विद्वान पुरोहितों के सानिध्य में यंत्र का अभिषेक और पूजन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं व्यवस्थाओं की निगरानी करते नज़र आए।
रामलला के दरबार में राष्ट्रपति: आस्था और समर्पण का दृश्य
यंत्र स्थापना के उपरांत, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने श्री रामलला के भव्य दरबार में हाजिरी लगाई।
- दर्शन-पूजन: राष्ट्रपति ने रामलला की प्रतिमा के सम्मुख शीश नवाया और विशेष पूजा-अर्चना की।
- भावुक क्षण: रामलला की दिव्य छवि देखकर राष्ट्रपति अभिभूत नज़र आईं। उन्होंने मंदिर की भव्यता और वहां की शांति की सराहना की।
- अतिथियों का सत्कार: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति को राम मंदिर का मॉडल और प्रसाद भेंट कर उनका अभिनंदन किया।
राष्ट्रपति के अयोध्या दौरे के प्रमुख पड़ाव:
| कार्यक्रम (Activity) | स्थान/विवरण (Venue/Detail) |
| श्रीराम यंत्र पूजन | राम मंदिर का द्वितीय तल (वैदिक पद्धति से)। |
| रामलला दर्शन | मुख्य गर्भगृह (आरती और पुष्पांजलि)। |
| अभिवादन | राज्यपाल और मुख्यमंत्री द्वारा आधिकारिक सत्कार। |
| सांस्कृतिक अवलोकन | मंदिर परिसर की नक्काशी और कलाकृतियों का निरीक्षण। |
मुख्यमंत्री योगी का विजन और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद: सुशासन की झलक
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रपति के इस दौरे को अविस्मरणीय बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी। मुख्यमंत्री ने स्वयं राष्ट्रपति को मंदिर के निर्माण कार्यों और भविष्य की योजनाओं के बारे में जानकारी दी। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने राष्ट्रपति को अयोध्या की महिला सशक्तिकरण योजनाओं और हस्तशिल्प के बारे में बताया।
प्रशासन ने सुरक्षा के ऐसे इंतजाम किए थे कि राष्ट्रपति की गरिमा के साथ-साथ आम श्रद्धालुओं को भी दर्शन में कोई बड़ी असुविधा न हो। राष्ट्रपति का यह दौरा यह संदेश देता है कि आधुनिक भारत अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत के प्रति कितना सजग है। नगर निगम और जिला प्रशासन ने पूरे मंदिर मार्ग को फूलों और रंगोलियों से सजाकर ‘नव्य अयोध्या’ की भव्यता को वैश्विक पटल पर प्रदर्शित किया।
“आज का दिन अयोध्या और पूरे देश के लिए ऐतिहासिक है। महामहिम राष्ट्रपति जी द्वारा ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना राम मंदिर की पूर्णता और भारत की सांस्कृतिक विजय का प्रतीक है।” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
निष्कर्ष: आध्यात्मिक चेतना और संवैधानिक गौरव का मिलन
अंततः, 19 मार्च 2026 का यह दिन अयोध्या के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की सहजता और उनकी अगाध श्रद्धा ने हर रामभक्त का दिल जीत लिया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की उपस्थिति ने इस आध्यात्मिक उत्सव को संवैधानिक गरिमा प्रदान की। Uttar Pradesh News के इस विशेष घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि अयोध्या अब विश्व की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में पूरी तरह स्थापित हो चुकी है। श्रीराम यंत्र की स्थापना के साथ ही राम मंदिर की आध्यात्मिक आभा अब और अधिक तेज़ होगी।








