अयोध्या | न्यूज़ डेस्क
उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या एक बार फिर एक ऐतिहासिक और गरिमामय पल की साक्षी बनने जा रही है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के 19 मार्च के प्रस्तावित दौरे को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर अयोध्या को भव्य और सांस्कृतिक स्वरूप में सजाया जा रहा है। राष्ट्रपति के अभिनंदन के लिए एयरपोर्ट से लेकर राम मंदिर के मुख्य द्वार तक पूरे मार्ग को एक उत्सव के रूप में परिवर्तित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के विजन के अनुरूप, प्रशासन और संस्कृति विभाग मिलकर यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि राष्ट्रपति का स्वागत अयोध्या की प्राचीन परंपराओं, वैदिक ऋचाओं और अवधी लोक संस्कृति के साथ पूरी भव्यता से किया जाए।
20 मंचों पर 250 कलाकारों का संगम: भक्ति और संस्कृति से गूंजेगी अयोध्या
राष्ट्रपति के भव्य स्वागत के लिए एयरपोर्ट से राम मंदिर गेट तक के मार्ग पर करीब 20 विशेष सांस्कृतिक मंच सजाए जाएंगे। सीडीओ कृष्ण कुमार सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री के विशेष निर्देशों का पालन करते हुए इन मंचों पर उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए लगभग ढाई सौ कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे। यह मार्ग केवल एक रास्ता नहीं, बल्कि एक ‘सांस्कृतिक कॉरिडोर’ के रूप में दिखाई देगा, जहाँ हर कदम पर रामायण के प्रसंगों और राम भक्ति की गूंज सुनाई देगी।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के मुख्य आकर्षण:
- अवधी लोकनृत्य: कलाकारों द्वारा पारंपरिक अवधी शैली में लोकनृत्य की प्रस्तुति।
- भजन एवं संकीर्तन: राम भक्ति से सराबोर भजन और बधावा गायन।
- रामायण की झलक: छोटे और बड़े मंचों पर रामायण आधारित झांकियां और रामलीला के अंश।
- वैदिक परंपरा: वेदपाठ, शंखनाद और ढोल-नगाड़ों की थाप के साथ पारंपरिक स्वागत।
शहर के प्रमुख चौराहों पर सजेगा ‘राममय’ वातावरण
अयोध्या के प्रमुख स्थानों पर इन मंचों को स्थापित किया जा रहा है, जिससे पूरा शहर राष्ट्रपति के स्वागत में एकाकार नज़र आए।
मंचों की स्थापना के प्रमुख केंद्र:
| स्थान (Location) | प्रस्तुति का स्वरूप |
| एयरपोर्ट रोड एवं नाका | पारंपरिक ढोल-नगाड़े और स्वागत गीत। |
| देवकाली एवं चूड़ामणि चौराहा | अवधी लोकगायन और झांकियां। |
| निषाद राज चौराहा | रामायण के प्रसंगों पर आधारित लघु नाटिका। |
| राम मंदिर गेट | शंखनाद, वेदपाठ और भव्य भजन संकीर्तन। |
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि छोटे मंचों पर 7 और बड़े मंचों पर लगभग 15 कलाकारों की टीम तैनात होगी। इन प्रस्तुतियों के माध्यम से अयोध्या की प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पटल पर मजबूती से स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री का विजन और प्रशासनिक मुस्तैदी: सुरक्षा और सुशासन का समन्वय
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वयं इस भव्य आयोजन की रूपरेखा की निगरानी कर रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि राष्ट्रपति का स्वागत ‘अतुल्य भारत’ और ‘नव्य अयोध्या’ की छवि के अनुरूप होना चाहिए। उत्तर प्रदेश के सुशासन और सांस्कृतिक पुनरुत्थान के मॉडल को दर्शाते हुए, अयोध्या के हर कोने को स्वच्छ और सुंदर बनाया गया है।
सीडीओ ने बताया कि सभी टीमें राम भक्ति और वैदिक परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने के लिए निरंतर अभ्यास कर रही हैं। राष्ट्रपति के इस दौरे के दौरान सुरक्षा के भी अभेद्य इंतजाम किए गए हैं, ताकि सांस्कृतिक उत्सव के साथ-साथ प्रोटोकॉल का भी पूर्णतः पालन हो सके। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में अयोध्या अब न केवल एक धार्मिक केंद्र, बल्कि वैश्विक सांस्कृतिक पर्यटन का सबसे बड़ा हब बनकर उभर रही है।
“राष्ट्रपति जी का अयोध्या आगमन हमारे लिए गर्व का विषय है। मुख्यमंत्री जी की मंशा के अनुरूप हम अयोध्या की वैभवशाली संस्कृति से उनका हृदयस्पर्शी अभिनंदन करने के लिए तैयार हैं।” — कृष्ण कुमार सिंह, सीडीओ अयोध्या
निष्कर्ष: सांस्कृतिक धरोहर का वैश्विक प्रदर्शन
अंततः, 19 मार्च को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की अयोध्या यात्रा प्रदेश की सांस्कृतिक शक्ति का एक बड़ा प्रदर्शन साबित होगी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में जिस प्रकार अयोध्या का कायाकल्प हुआ है, वह राष्ट्रपति के स्वागत की इन तैयारियों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। Uttar Pradesh News के इस विशेष आयोजन के माध्यम से अयोध्या की प्राचीन गौरवगाथा और आधुनिक विकास का संगम पूरी दुनिया देखेगी। यह स्वागत केवल एक औपचारिकता नहीं, बल्कि ‘राम राज्य’ की उस परिकल्पना का जीवंत उदाहरण होगा, जहाँ अतिथि का स्वागत साक्षात ईश्वर की तरह किया जाता है।





