नई दिल्ली | कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन पर भारत सरकार के रुख की तीखी आलोचना की है। सोनिया गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार और पुराने मित्र देश के शोक में भारत की ‘औपचारिक चुप्पी’ हैरान करने वाली है।
सोनिया गांधी के प्रहार के मुख्य बिंदु:
- रणनीतिक विफलता: सोनिया गांधी ने कहा कि ईरान और भारत के ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। ऐसे समय में जब पूरा मिडिल ईस्ट संकट में है, भारत का इस तरह का रवैया हमारे डिप्लोमैटिक हितों को नुकसान पहुँचा सकता है।
- पुराने दोस्तों की अनदेखी: उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी सरकार अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर भारत के पारंपरिक सहयोगियों की अनदेखी कर रही है।
- राजकीय शोक का मुद्दा: कांग्रेस की ओर से यह भी संकेत दिया गया कि जब पूर्व में ऐसे बड़े नेताओं का निधन हुआ है, तो भारत ने राजकीय शोक घोषित किया है, लेकिन इस बार सरकार ने दूरी बना ली है।
बीजेपी का पलटवार (संभावित)
हालांकि सरकार की ओर से अभी आधिकारिक प्रतिक्रिया आना बाकी है, लेकिन बीजेपी सूत्रों का कहना है कि भारत अंतरराष्ट्रीय प्रोटोकॉल और वर्तमान परिस्थितियों के अनुसार ही कदम उठा रहा है। सरकार इसे भारत की स्वतंत्र विदेश नीति का हिस्सा बता रही है।
भारत-ईरान संबंधों पर असर
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सोनिया गांधी का यह बयान घरेलू राजनीति के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बनेगा। चाबहार पोर्ट और एनर्जी सिक्योरिटी के लिहाज से ईरान भारत के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, ऐसे में यह विवाद संबंधों में कड़वाहट पैदा कर सकता है।









