झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया के पास सोमवार (23 फरवरी) को एक भीषण विमान हादसा हुआ। रांची से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाला एक एयर एंबुलेंस अनियंत्रित होकर क्रैश हो गया। इस हृदयविदारक घटना में विमान में सवार मरीज, डॉक्टर और क्रू मेंबर्स सहित सभी 7 लोगों की मौत हो गई। प्रशासन और बचाव दल ने मौके पर पहुँचकर शवों को बरामद कर लिया है।
ब्लैक बॉक्स की कमी: जाँच में सबसे बड़ी बाधा
अधिकारियों ने पुष्टि की है कि इस एयर एंबुलेंस में ब्लैक बॉक्स (Flight Data Recorder) मौजूद नहीं था। आमतौर पर छोटे निजी विमानों और कुछ चार्टर्ड एयरक्राफ्ट्स में ब्लैक बॉक्स की अनिवार्यता नहीं होती, लेकिन इस कमी ने जाँच टीम के लिए बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है। ब्लैक बॉक्स के बिना पायलट की अंतिम बातचीत और विमान की तकनीकी स्थिति का सटीक डेटा मिलना मुश्किल होगा।
एक्सपर्ट्स का क्या है कहना? कैसे होगी जाँच?
हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए विमानन विशेषज्ञों ने अब तीन वैकल्पिक रास्तों पर ध्यान केंद्रित किया है:
- ATC कम्युनिकेशन: एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पायलट के बीच हुई अंतिम बातचीत की रिकॉर्डिंग को खंगाला जाएगा।
- मलबे का फॉरेंसिक विश्लेषण: इंजन की स्थिति, पंखों के विन्यास और जले हुए हिस्सों का अध्ययन कर तकनीकी खराबी का पता लगाया जाएगा।
- प्रत्यक्षदर्शियों के बयान: चतरा के स्थानीय लोग जिन्होंने विमान को गिरते देखा, उनके बयान हादसे के अंतिम क्षणों को समझने में मदद करेंगे।
जाँच के दायरे में ये सवाल:
- क्या खराब मौसम हादसे की मुख्य वजह थी?
- क्या उड़ान भरने से पहले विमान की तकनीकी फिटनेस की जाँच की गई थी?
- क्या इंजन फेल होना या ईंधन की कमी इस त्रासदी का कारण बनी?
इस हादसे ने एयर एंबुलेंस सेवाओं के सुरक्षा मानकों और छोटे विमानों में ब्लैक बॉक्स की अनिवार्यता पर फिर से बहस छेड़ दी है।






