जालोर |
राजस्थान की भक्ति और शक्ति की केंद्र स्थली जालोर में आज आध्यात्मिक चेतना का ज्वार देखने को मिला। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जालोर स्थित ‘श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर’ में आयोजित भव्य महायज्ञ की पूर्णाहुति में सम्मिलित होकर लोक-कल्याण की कामना की। इसके उपरांत आयोजित एक विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने सनातन संस्कृति की गौरवगाथा और राष्ट्रवाद का शंखनाद किया। जालोर की इस पावन धरा पर मुख्यमंत्री का स्वागत पारंपरिक राजस्थानी अंदाज़ में किया गया, जहाँ हजारों की संख्या में मौजूद श्रद्धालुओं ने ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ के जयघोष से आसमान गुंजा दिया।
सनातन संस्कृति और राष्ट्रीय एकता: जालोर की धरा से मुख्यमंत्री का ओजस्वी उद्बोधन
धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की आत्मा सनातन धर्म में बसती है और हमारे देवालय केवल पूजा के स्थान नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता के जाग्रत केंद्र हैं। श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर की महिमा का गुणगान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ऋषि जाबालि की यह तपस्थली सदियों से मानवता को सत्य का मार्ग दिखा रही है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आज पूरा विश्व भारत की सांस्कृतिक शक्ति की ओर देख रहा है। उन्होंने अयोध्या में प्रभु श्री राम के भव्य मंदिर निर्माण का उदाहरण देते हुए कहा कि यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भारत के ‘सांस्कृतिक पुनर्जागरण’ का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने आह्वान किया कि हमें अपनी जड़ों से जुड़कर ही एक सशक्त और विकसित भारत का निर्माण करना होगा।
राजस्थान और उत्तर प्रदेश का अटूट नाता: सांस्कृतिक सेतु को मिल रही मजबूती
जालोर के इस मंच से मुख्यमंत्री ने राजस्थान और उत्तर प्रदेश के बीच गहरे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक संबंधों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि नाथ संप्रदाय का राजस्थान से सदियों पुराना नाता है और जालोर की इस भूमि ने कई महान संतों को जन्म दिया है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए जो कदम उठाए हैं, उनसे राजस्थान के श्रद्धालुओं को भी विशेष लाभ मिल रहा है।
महायज्ञ एवं धर्मसभा की मुख्य झलकियाँ:
| कार्यक्रम | विवरण |
| महायज्ञ पूर्णाहुति | मुख्यमंत्री ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच विश्व शांति के लिए आहुति दी। |
| श्रद्धालुओं का हुजूम | जालोर और आसपास के जिलों से हजारों की संख्या में भक्त पहुँचे। |
| संत समागम | देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए पूज्य संतों का मुख्यमंत्री ने आशीर्वाद लिया। |
| स्वागत सत्कार | स्थानीय मंदिर कमेटी और जनप्रतिनिधियों द्वारा साफा पहनाकर अभिनंदन। |
विरासत का सम्मान और आधुनिक राष्ट्रवाद: मुख्यमंत्री का कड़ा संदेश
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने विरासत के संरक्षण को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि “राम और शिव” इस देश के कण-कण में विद्यमान हैं। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अपने तीर्थ स्थलों को स्वच्छ और भव्य बनाए रखें। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि विकास का असली अर्थ केवल सड़कों और इमारतों तक सीमित नहीं है, बल्कि अपनी पहचान और पूर्वजों के मूल्यों को सहेजना भी है।
उन्होंने जालोर के युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि गुलामी की मानसिकता को त्याग कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब हम अपनी विरासत का सम्मान करते हैं, तो पूरी दुनिया हमारा सम्मान करती है। जालोर की इस सभा में मुख्यमंत्री ने जिस प्रकार आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ राष्ट्रभक्ति का संचार किया, उसने हर राजस्थानी के दिल को जीत लिया।
“जालोर की यह धरती तप और त्याग की भूमि है। श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित यह महायज्ञ प्रदेश और देश में सुख-समृद्धि लेकर आएगा। सनातन धर्म ही हमारी पहचान और हमारी शक्ति है।” — मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ
निष्कर्ष: जालोर से उठी सांस्कृतिक चेतना की नई लहर
अंततः, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जालोर यात्रा ने राजस्थान के धार्मिक और सांस्कृतिक वातावरण को एक नई ऊर्जा प्रदान की है। श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित यह विशाल धर्मसभा यह सिद्ध करती है कि जनता के मन में अपनी संस्कृति और परंपराओं के प्रति कितना अगाध प्रेम है। उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री के ओजस्वी विचारों ने जालोर की जनता को राष्ट्र प्रथम की भावना से ओतप्रोत कर दिया है। यह आयोजन आने वाले समय में राजस्थान और उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक संबंधों में एक नया मील का पत्थर साबित होगा।






