उज्जैन |
मध्य प्रदेश की धार्मिक और ज्ञान की नगरी उज्जैन में आज शिक्षा और गौरव का संगम देखने को मिला। सम्राट विक्रमादित्य (विक्रम) विश्वविद्यालय के भव्य दीक्षांत समारोह में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मिलित होकर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। पारंपरिक वेशभूषा में आयोजित इस समारोह में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के मेधावी छात्र-छात्राओं को उपाधियाँ और स्वर्ण पदक (Gold Medals) प्रदान किए गए। इस अवसर पर राज्यपाल ने विद्यार्थियों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार रहने का आह्वान किया, वहीं मुख्यमंत्री ने उज्जैन की शैक्षणिक विरासत को वैश्विक स्तर पर पुनर्स्थापित करने का संकल्प दोहराया।
ज्ञान और चरित्र का समन्वय: राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल का दीक्षांत उद्बोधन
समारोह की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने दीक्षित हो रहे विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य केवल डिग्री प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के प्रति संवेदनशील और उत्तरदायी नागरिक बनना है। राज्यपाल ने इस बात पर जोर दिया कि हमारे युवाओं को तकनीक के साथ-साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़े रहना चाहिए।
उन्होंने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि मध्य प्रदेश के शिक्षण संस्थान अब न केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दे रहे हैं, बल्कि नवाचार और शोध (Research) के क्षेत्र में भी नए आयाम स्थापित कर रहे हैं। राज्यपाल ने विशेष रूप से छात्राओं के उत्कृष्ट प्रदर्शन पर प्रसन्नता व्यक्त की और उन्हें ‘विकसित भारत’ की आधारशिला बताया। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने ज्ञान का उपयोग समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों के उत्थान के लिए करें।
नई शिक्षा नीति और मध्य प्रदेश का विजन: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संबोधन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, जो स्वयं इसी धरा से संबंध रखते हैं, उन्होंने समारोह को संबोधित करते हुए भावुक स्वर में कहा कि उज्जैन प्राचीन काल से ही महाराजा विक्रमादित्य के न्याय और सांदीपनि आश्रम के ज्ञान के लिए जाना जाता रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्य प्रदेश देश का वह पहला राज्य है जिसने ‘राष्ट्रीय शिक्षा नीति’ (NEP) को सबसे प्रभावी ढंग से लागू किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य शिक्षा को रोजगारोन्मुखी बनाना है। उन्होंने घोषणा की कि उज्जैन के इस विश्वविद्यालय को आधुनिक सुविधाओं और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किया जाएगा।
दीक्षांत समारोह की मुख्य झलकियाँ:
| विवरण | सांख्यिकी/जानकारी |
| कुल उपाधि धारक | 500+ विद्यार्थी (विभिन्न संकाय) |
| स्वर्ण पदक (Gold Medals) | 85 मेधावी छात्र-छात्राओं को प्रदान किए गए |
| मुख्य अतिथि | राज्यपाल एवं मुख्यमंत्री |
| विषय | परंपरागत ज्ञान और आधुनिक शोध का संगम |
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों से कहा कि “आप सम्राट विक्रमादित्य की विरासत के ध्वजवाहक हैं, आपकी सफलता में ही प्रदेश और देश की सफलता निहित है।”
शिक्षा के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत: एक नया शैक्षणिक रोडमैप
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अधिकारियों और शिक्षाविदों से संवाद करते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों को केवल डिग्री बांटने वाले केंद्र नहीं बने रहना चाहिए, बल्कि उन्हें ‘कौशल विकास’ के केंद्र के रूप में उभरना होगा। मध्य प्रदेश सरकार ने बजट में उच्च शिक्षा के लिए विशेष प्रावधान किए हैं, ताकि युवाओं को स्टार्टअप और उद्यमिता के क्षेत्र में प्रोत्साहित किया जा सके।
राज्यपाल ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के ‘एनुअल रिपोर्ट’ का विमोचन भी किया। दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों के चेहरों पर अपनी मेहनत का फल पाने की खुशी साफ झलक रही थी। मुख्यमंत्री ने उज्जैन की इस पावन भूमि से यह संदेश भी दिया कि शिक्षा ही वह शस्त्र है जिससे गरीबी और अज्ञानता को पूरी तरह खत्म किया जा सकता है। समारोह के अंत में सभी विद्यार्थियों ने राष्ट्र निर्माण की शपथ ली और अपने सुनहरे भविष्य की ओर कदम बढ़ाए।
निष्कर्ष: उज्जैन की ज्ञान परंपरा को नई ऊर्जा
अंततः, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय का यह दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के जीवन में एक नया अध्याय जोड़ने वाला साबित हुआ। राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल की गरिमामय उपस्थिति और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के प्रेरणादायी मार्गदर्शन ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया। Madhya Pradesh News के इस विशेष घटनाक्रम से यह स्पष्ट है कि प्रदेश का शीर्ष नेतृत्व युवाओं के भविष्य को लेकर कितना सजग और गंभीर है। उज्जैन की यह ज्ञान परंपरा अब नई पीढ़ी के माध्यम से पूरे विश्व में अपनी चमक बिखेरने के लिए तैयार है।








