भोपाल |
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल आज आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर रही। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल स्थित रविंद्र भवन में आयोजित भव्य ‘कोटि सूर्य उपासना’ कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत 2083 के मंगलकारी आगमन पर आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने भगवान सूर्य की आराधना की और प्रदेशवासियों को सृष्टि के आरंभ दिवस, गुड़ी पड़वा और चैत्र नवरात्रि सहित आज मनाए जा रहे सभी महापर्वों की आत्मीय बधाई और मंगलकामनाएं दीं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने भारतीय कालगणना और हमारी गौरवशाली परंपराओं को आधुनिक जीवन का आधार बनाने पर जोर दिया।
सांस्कृतिक पुनरुत्थान और नव संवत्सर: मुख्यमंत्री का संबोधन
सभागार में उपस्थित साधकों और प्रबुद्ध नागरिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि आज का दिन केवल एक तिथि नहीं, बल्कि पूरी सृष्टि की नई शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि “हमारा नया साल प्रकृति के साथ जुड़ा हुआ है, जहाँ हरियाली और नई ऊर्जा का संचार होता है।”
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से विक्रम संवत 2083 की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महाराजा विक्रमादित्य द्वारा शुरू की गई यह कालगणना आज भी वैज्ञानिक रूप से सबसे सटीक है। उन्होंने आह्वान किया कि युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और इस महान इतिहास पर गर्व करना चाहिए।
कोटि सूर्य उपासना: सामूहिक शक्ति और आध्यात्मिक चेतना
कार्यक्रम के दौरान सामूहिक सूर्य उपासना का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य समाज में सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता फैलाना है।
आज मनाए जा रहे प्रमुख पर्व और उनका महत्व:
| पर्व का नाम | आध्यात्मिक/सांस्कृतिक महत्व |
| विक्रम संवत 2083 | भारतीय पंचांग के अनुसार नए वर्ष का प्रारंभ। |
| सृष्टि आरंभ दिवस | पौराणिक मान्यता के अनुसार ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि की रचना का दिन। |
| गुड़ी पड़वा | महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में नए साल की शुरुआत का जश्न। |
| चैत्र नवरात्रि | शक्ति की आराधना और नौ दिनों के उपवास का शुभारंभ। |
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्य प्रदेश की मंत्रिपरिषद और शासन का लक्ष्य है कि प्रदेश का विकास इन सांस्कृतिक मूल्यों के साथ आगे बढ़े। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी प्रमुख मंदिरों और सांस्कृतिक केंद्रों पर इस प्रकार के आयोजनों को प्रोत्साहित किया जाए ताकि हमारी विरासत अक्षुण्ण रहे।
विकसित मध्य प्रदेश का संकल्प: जनसेवा ही असली आराधना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सूर्य उपासना को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत बताते हुए कहा कि जिस प्रकार सूर्य बिना भेदभाव के पूरे विश्व को प्रकाश देता है, हमारी सरकार भी उसी संकल्प के साथ ‘सबका साथ, सबका विकास’ की दिशा में कार्य कर रही है।
- किसान कल्याण: खेती में नई तकनीक के उपयोग पर जोर।
- युवा विकास: कौशल विकास और नए शैक्षणिक अवसरों का सृजन।
- स्वच्छता: स्वच्छता के मामले में मध्य प्रदेश की देश में अग्रणी भूमिका को बरकरार रखना।
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में शामिल हुए सभी संतों और विद्वानों का आशीर्वाद लिया और विश्वास जताया कि विक्रम संवत 2083 प्रदेश के लिए समृद्धि और खुशहाली लेकर आएगा। उन्होंने उपस्थित जनसमूह से अपील की कि वे जल संरक्षण और पर्यावरण रक्षा को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं।
“सूर्य ऊर्जा का कारक है और उपासना हमारी शक्ति है। विक्रम संवत 2083 का यह नया सवेरा हमारे प्रदेश के हर घर में सुख-समृद्धि का प्रकाश फैलाए, यही मेरी प्रार्थना है।” — मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
निष्कर्ष: परंपरा और आधुनिकता का सुंदर मेल
अंततः, रविंद्र भवन में आयोजित ‘कोटि सूर्य उपासना’ कार्यक्रम ने यह सिद्ध कर दिया है कि मध्य प्रदेश अपनी सांस्कृतिक जड़ों को मजबूती से थामे हुए विकास की राह पर अग्रसर है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के ओजस्वी विचारों ने नव संवत्सर के स्वागत को एक नया आयाम दिया। Madhya Pradesh News के इस ऐतिहासिक आयोजन से न केवल आध्यात्मिक चेतना जागृत हुई है, बल्कि समाज में एकता और सेवा का संदेश भी गया है।







