वर्ष 2026 का पहला चंद्र ग्रहण 3 मार्च (मंगलवार) को लगने जा रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, यह एक ‘ग्रस्तोदय चंद्र ग्रहण’ होगा, जो भारत के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। ग्रहण का संयोग स्नान-दान की पूर्णिमा के दिन बनने के कारण इसका धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ गया है।
ग्रहण और सूतक का समय (नोट कर लें):
- ग्रहण का प्रारंभ: दोपहर 3:21 बजे से।
- ग्रहण की समाप्ति: शाम 6:46 बजे तक।
- सूतक काल: ग्रहण शुरू होने से 9 घंटे पहले, यानी प्रातः 9:20 बजे से ही सूतक लग जाएगा, जो शाम 6:46 बजे ग्रहण समाप्ति तक रहेगा।
पूर्णिमा तिथि का गणित:
स्नान और दान के लिए पूर्णिमा तिथि 3 मार्च को ही मान्य होगी।
- पूर्णिमा प्रारंभ: 2 मार्च को शाम 5:55 बजे से।
- पूर्णिमा समाप्ति: 3 मार्च को शाम 5:07 बजे।
होली के कार्यों पर पड़ेगा असर:
ग्रहण और लंबे सूतक काल के कारण इस वर्ष होली से जुड़े मांगलिक और धार्मिक कार्यों में बाधा आएगी। शास्त्रों के अनुसार, सूतक काल के दौरान कोई भी शुभ कार्य, पूजा-पाठ या रसोई से जुड़ा भारी काम वर्जित माना जाता है। ऐसे में होली की तैयारियों और उससे जुड़ी परंपराओं को सूतक शुरू होने से पहले या ग्रहण खत्म होने के बाद ही संपन्न किया जा सकेगा।
सूतक काल में क्या करें और क्या न करें?
- मंदिरों के कपाट: सूतक लगते ही मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाएंगे।
- भोजन: वृद्ध, बालक और रोगियों को छोड़कर सामान्य जन को सूतक और ग्रहण के दौरान भोजन से परहेज करना चाहिए।
- गर्भवती महिलाएं: ग्रहण के दौरान गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतने और बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
- दान-पुण्य: ग्रहण समाप्ति (शाम 6:46 बजे) के बाद स्नान करके दान-पुण्य करना अत्यंत फलदायी माना जाता है।









