उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार के साझा प्रयासों से राज्य को एक और शानदार कनेक्टिविटी मिलने जा रही है। लखनऊ से नेपाल सीमा तक प्रस्तावित 6-लेन ग्रीनफील्ड हाइवे के निर्माण की योजना अब धरातल पर उतरने को तैयार है। लगभग ₹27,000 करोड़ के भारी-भरकम बजट वाली यह परियोजना न केवल उत्तर प्रदेश के विकास को गति देगी, बल्कि भारत-नेपाल के व्यापारिक रिश्तों को भी मजबूती प्रदान करेगी।
सफर होगा आसान: 2 घंटे में सीमा पार
वर्तमान में लखनऊ से नेपाल बॉर्डर पहुँचने में 5 से 6 घंटे का समय लगता है। लेकिन इस नए 6-लेन हाइवे के बनने के बाद यह दूरी सिमट जाएगी और यात्री महज 2 घंटे में बॉर्डर तक पहुँच सकेंगे। इससे पर्यटन और आपातकालीन सेवाओं को बड़ी राहत मिलेगी।
इन 5 जिलों की बदलेगी तकदीर
यह एक्सप्रेसवे उत्तर प्रदेश के 5 प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगा, जिससे यहाँ औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों में इजाफा होगा:
- लखनऊ: प्रोजेक्ट का शुरुआती बिंदु, जो राजधानी को सीधे बॉर्डर से जोड़ेगा।
- बाराबंकी: यहाँ के किसानों और स्थानीय उद्यमियों को वैश्विक बाजार मिलेगा।
- बहराइच: सीमावर्ती जिला होने के नाते यहाँ व्यापारिक हब विकसित होंगे।
- श्रावस्ती: पर्यटन (बौद्ध सर्किट) को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।
- बलरामपुर: बुनियादी ढांचे में सुधार से यहाँ रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
प्रोजेक्ट की मुख्य विशेषताएं:
- लागत: ₹27,000 करोड़ का निवेश।
- लेन: 6-लेन चौड़ा सुविधायुक्त एक्सप्रेसवे।
- कनेक्टिविटी: इसे पूर्वांचल एक्सप्रेसवे और आउटर रिंग रोड से भी जोड़ा जा सकता है।
- आर्थिक लाभ: नेपाल के साथ होने वाले आयात-निर्यात में लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी।







