दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आज शराब नीति घोटाले से जुड़े सीबीआई (CBI) मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को बड़ी राहत देते हुए बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में केंद्रीय जांच ब्यूरो द्वारा लगाए गए आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि सिसोदिया के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं।
कोर्ट की बड़ी टिप्पणियाँ:
सुनवाई के दौरान विशेष न्यायाधीश ने कड़े शब्दों में जांच एजेंसी की दलीलों पर सवाल उठाए। कोर्ट ने अपने आदेश में मुख्य रूप से तीन बातें कहीं:
- सबूतों का अभाव: अदालत ने स्पष्ट किया कि मनीष सिसोदिया के खिलाफ भ्रष्टाचार या अनुचित लाभ लेने के कोई पुख्ता सबूत रिकॉर्ड पर नहीं हैं।
- साजिश का कोई आधार नहीं: कोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी यह साबित करने में पूरी तरह विफल रही कि शराब नीति के निर्माण या क्रियान्वयन में कोई आपराधिक साजिश रची गई थी।
- आरोपों में दम नहीं: सीबीआई द्वारा लगाए गए आरोपों को अदालत ने अपर्याप्त और आधारहीन करार दिया।
आम आदमी पार्टी के लिए संजीवनी
लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहे अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया के लिए यह फैसला किसी संजीवनी से कम नहीं है। सिसोदिया को इस मामले में 17 महीने से अधिक समय जेल में बिताना पड़ा था। इस फैसले के बाद अब पार्टी इसे ‘सत्य की जीत’ और राजनीतिक प्रतिशोध के अंत के रूप में पेश कर रही है।
CBI के लिए बड़ा झटका
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला सीबीआई के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि एजेंसी इस हाई-प्रोफाइल मामले में भ्रष्टाचार के तार जोड़ने में नाकाम रही। हालांकि, यह देखना होगा कि क्या जांच एजेंसी इस फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती देती है।









