जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में भारतीय सुरक्षाबलों ने आतंकवाद के खिलाफ चल रहे युद्ध में एक ऐतिहासिक कामयाबी हासिल की है। रविवार को हुए भीषण एनकाउंटर में जैश-ए-मोहम्मद के तीन सबसे खतरनाक और इनामी आतंकियों को मार गिराया गया है। इसके साथ ही सुरक्षाबलों ने पिछले 30 दिनों के भीतर इस खूंखार आतंकी ग्रुप के सभी 8 सदस्यों को खत्म कर पूरे गिरोह का नामोनिशान मिटा दिया है।
मारे गए आतंकियों की पहचान: 5-5 लाख के थे इनामी
मारे गए तीनों आतंकियों की शिनाख्त हो चुकी है, जो लंबे समय से सुरक्षाबलों की ‘हिट लिस्ट’ में थे:
- सैफुल्लाह: जैश का खतरनाक रणनीतिकार।
- फरमान अली: स्थानीय स्तर पर युवाओं को गुमराह करने और हमले करने में माहिर।
- बाशा उर्फ हुरैरा: किश्तवाड़ क्षेत्र में कई आतंकी गतिविधियों का मास्टरमाइंड।
नोट: इन तीनों आतंकियों पर किश्तवाड़ पुलिस ने पिछले साल 5-5 लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
30 दिनों का महा-अभियान: खुफिया इनपुट का कमाल
यह कामयाबी किसी एक दिन की मेहनत नहीं, बल्कि पिछले एक महीने से चल रहे सुनियोजित ऑपरेशन का नतीजा है।
- इंटेलिजेंस लीड: खुफिया विभाग (Intelligence Bureau) और स्थानीय पुलिस से मिले सटीक इनपुट के आधार पर इस ग्रुप को ट्रैक किया गया।
- सफैया: पिछले 30 दिनों में सुरक्षाबलों ने एक-एक कर इस ग्रुप के सभी 8 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया।
- बड़ी उपलब्धि: इस पूरे ग्रुप के खात्मे के साथ ही किश्तवाड़ और आसपास के जिलों में जैश-ए-मोहम्मद का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।
सुरक्षाबलों की रणनीति और क्षेत्र पर प्रभाव
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह एनकाउंटर सुरक्षाबलों के बढ़ते मनोबल और बेहतर समन्वय का प्रतीक है। किश्तवाड़ जैसे कठिन भौगोलिक क्षेत्र में आतंकियों को ढूंढकर मारना भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस की दक्षता को दर्शाता है। इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में सुरक्षा का भाव बढ़ेगा और आतंकवादियों के स्लीपर सेल पर भी दबाव बढ़ेगा।






