गोरखपुर | मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ के लिए गोसेवा केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री ने अपनी दिनचर्या के अनुसार गोशाला में समय बिताया और गोवंश के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा प्रकट की।
नामों की पुकार और स्नेहिल स्पर्श
जैसे ही मुख्यमंत्री गोशाला पहुँचे, उन्होंने वहां मौजूद गोवंश को उनके नामों— श्यामा, गौरी, गंगा और भोला से पुकारा। मुख्यमंत्री की आवाज़ सुनते ही गोवंश उनकी ओर दौड़ पड़े। मुख्यमंत्री ने सभी के माथे पर हाथ फेरा और बड़े ही स्नेह के साथ उन्हें अपने हाथों से गुड़ और रोटी खिलाई।
नंदी ‘भोले’ की विशेष सेवा
इस दौरान एक भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब मुख्यमंत्री ‘भोले’ नामक एक विशाल नंदी के पास पहुँचे। नंदी के शरीर पर लगी धूल-मिट्टी को मुख्यमंत्री ने स्वयं अपने हाथों से साफ किया और फिर कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया कि उसे सूखे कपड़े से अच्छी तरह साफ रखा जाए।
मोर को भी खिलाई रोटी
गोसेवा के साथ-साथ मुख्यमंत्री का प्रकृति और पक्षी प्रेम भी नजर आया। उन्होंने मंदिर परिसर में मौजूद मोर को भी बड़े दुलार के साथ अपने हाथों से रोटी खिलाई। मुख्यमंत्री ने गोशाला के कार्यकर्ताओं को सख्त निर्देश दिए कि भीषण गर्मी और बदलते मौसम के बीच गोवंश के खान-पान और स्वास्थ्य देखभाल में कोई कमी नहीं आनी चाहिए।
गुरु चरणों में नवाया शीश
इससे पूर्व, मुख्यमंत्री की दिनचर्या परंपरागत रही। उन्होंने शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया और अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि स्थल पर जाकर शीश झुकाकर आशीर्वाद प्राप्त किया।








